CURATED BY – UMESH KUSHWAHA | CITYCHIEFNEWS

सतना, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सतना द्वारा क्षेत्रीय अधिकारी श्री एस.पी. झा के दिशा निर्देशन पर एवं प्रयोगशाला प्रभारी डॉ राहुल द्विवेदी के मार्गदर्शन में गठित टीम  विनोद तिवारी व राजकुमार मिश्रा द्वारा गणेश दुर्गा मूर्ति निर्माण एवं विसर्जन के संबंध में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड  द्वारा जारी गाइडलाइन अनुसार सतना जिला एवं मैहर जिले में विभिन्न मूर्ति निर्माता के यहां जाकर पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण अनुकूल मूर्ति निर्माण की अपील की गई व समझाइए दी गई ।शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उचेहरा में संगोष्ठी  का आयोजन किया गया जिसमें राजकुमार मिश्रा द्वारा गणेश दुर्गा मूर्ति निर्माण व विसर्जन सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंध एवं पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई एवं गणेश/दुर्गा विसर्जन को लेकर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एक विस्तृत गाइड लाइन जारी की गयी है। इस गाइड लाइन में मूर्तिकारों और इसके विक्रेताओं को प्रदूषण को लेकर सजग रहने के लिये कहा गया है। गाइड लाइन के अनुसार मूर्तियों का निर्माण ऐसे वस्तुओं से किया जाय, जो आसानी से पानी में विघटित हो सके और प्रदूषण को न बढ़ाये। मूर्ति निर्माण मिट्टी एवं प्राकृतिक वस्तुओं से किया जावे एवं सजावट हेतु प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाय।
आम नागरिकों के लिये भी गाइड लाइन में पी.ओ.पी. से बनी मूर्तियों को नदी, तालाब, घाट में विसर्जित नहीं करना है। इसे सिर्फ उन्हीं जगहों पर विसर्जित करना चाहिये जिसे प्रशासन की ओर से चिन्हित कृत्रिम कुण्डों का निर्माण प्रशासन द्वारा जिस स्तर पर किया गया है वहीं करना चाहिये। विसर्जन के प्रहले सजावटी सामग्री अलग कर लेना चाहिए 
नदियों व अन्य जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने का दायित्व आम आदमी का ही है। धार्मिक  कर्मकांडों से प्रदूषित होती नदियों के बचाव में प्रत्येक जागरूक व्यक्ति को आगे आना होगा। इसके लिए धार्मिक कर्मकांड़ों में इको-फ्रेंडली यानी प्रकृति मित्र तरीकों को अपनाया जाना चाहिए। जिसके तहत मूर्तियों को बनाते समय केवल मिट्टी का ही प्रयोग करना चाहिए। किसी भी प्रकार की विषैली धातुओं व प्लास्टिक के उपयोग से बनी मूर्तिया अंततः पर्यावरण के प्रदूषण का कारण बनती हैं।प्लास्टर आफ पेरिस की जगह पर्यावरण अनुकूल प्राकृतिक पदार्थों जैसे मिट्टी, चंदन की लकड़ी से बनी गणपति मूर्ति को अपनाकर भी हम जलीय जीवन को बचानें में अपना योगदान दे सकते हैं। अगर हम चाहें तो एक ही गणपति प्रतिमा का कई वर्षों तक उपयोग कर सकते हैं और इसे विसर्जित करने के जगह दूसरी छोटी प्रतिमाओं को विसर्जित कर सकते हैं। इको फेन्डली प्रतिमा का उपयोग करके ये ऐसी प्रतिमायें होती हैं जो आसानी से पानी में घुल जाती हैं। ऐसी मूर्तियों को खरीदकर जिनमें कृत्रिम पेंट के जगह हल्दी तथा अन्य प्राकृतिक रूप से प्राप्त रंगों का उपयोग किया गया हो।
मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सतना पर्यावरण संरक्षण हेतु  नुक्कड़ नाटक संगोष्ठी एवं सेमिनार प्रिंट मीडिया सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम किए जाते हैं सभी आम नागरिकों से मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सतना अपील करता है पर्यावरण संरक्षण में अपना अमूल्य योगदान देकर स्वच्छ सतना स्वच्छ मैहर  हो अपना क्लीन सिटी ग्रीन सिटी बनाने में अपना योगदान प्रदान करें।