रीना को मौत को भूना रहा भूमाफिया, सीबीआई जाँच की मांग
ब्योहारी में रहने वाली रीना की लाश बाणसागर में मिली
CURATED BY – MOHMMAD MUNEER | CITYCHIEFNEWS
शहडोल, करो फर्ज की पुलिस का सारा का सारा तंत्र भूमाफिया, ड्रग्स माफिया, शराब माफ़िया के इशारे में ही काम करता हो और अब जिले में साहूकार भी चोर और चोर भी साहूकार या नेता भी कहा जा रहा है, और यह सब तब चल रहा है जब उस तथाकथित माफिया के एक पैर हवालात में और एक जमानत और जीवन कोर्ट कचहरी करते करते बीत रहा हो, कहते है एक अर्शा बीता चच्चा की चकरी करते करते कबाड़ लोहा, घरो के टूटते ताले, शहर चोर के हवाले वाले खेल से पेट पर्दा चलता था, पुराने लोग है अभी जिन्होंने रस्तोगी के लठैत से लेकर महिलाओ की जब कतरदी है, मामला पुलिस के संज्ञान में भी है, कहानी इतने में ही नहीं ख़तम होती इनकी नेतागिरी युवाओ की रगो में जहर घोलने का काम गिरोह बनाकर कर रही है कहा जाता है, इस उचक्के ने रेलवे में कर्मचारी के भेस में एक माफिया की घुस पैठ करा दी है, जिसने बुजुर्ग की चाय नास्ता की ढ़ेरी उजाड़ कर ज़मीन हड़पी है, इन्ही सभी करतूत की वजह से लोगो में भय होना भी लाजिमी है l कहते है हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे, ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसे l
शहडोल, कहते है की अपनी योग्यता का सही उपयोग किया गया तो समाज में पत्रकारिता दर्पण का काम करती है, वही इस विद्या का बेजा इस्तेमाल किया गया तो जनता का पत्रकारिता से विश्वास उठ जायेगा, फर्ज करो की कोई शिकायत किसी के विरुद्ध आई, सामान्य उस शिकायत में इस कदर नमक़ मिर्ची लगाकर पेश कर दिया जाये की एक बेगुनाह परिवार समाज में गुनहगार की नजरो से देखा जाए, फर्जी मढ़ दिया आरोप पुलिस जाँच में सामने आएगा ही, लेकिन जिस परिवार में लगभग 90, 70 वर्ष के बुजुर्ग हो जिसपर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे है उसकी माँ किडनी की बीमारी से ग्रसित है, यदि इस बीच इस षड्यंत्र और बुने चक्रब्यूह में अपने इंजीनियरिंग की पढाई कर रहे बच्चे को फसाया जा रहा है, ह्रदय घात से काम नहीं है, हाल ही में, अलख आलोक श्रीवास्तव बनाम भारत संघ [Writ Petition(s) (Civil) No(s). 468/2020] के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी यह टिपण्णी की थी कि फर्जी ख़बरों के जरिये फैलने वाला आतंक, लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।
मामले की हक़ीक़त और फ़साना
मामले में नीलू पांडेय पति सुरेश पांडेय सेवानिवृत पुलिस विभाग का कहना है की शहडोल की जनता को भली भांति पता है बेबुनियाद एक परिवार को सिर्फ इसलिए टारगेट किया जा रहा की अभिषेक मिश्रा पिता श्रीनारायण मिश्रा निवासी पुरानी बस्ती ने न सिर्फ पुरानी बस्ती का माहौल बिगाड़ा है बल्कि स्थानीय युवाओ को अवैध कारोबार में धकेल रहा है और जो भी इस सामाजिक बुराई का विरोध करता है फर्जी मुकदमो में चुनिंदा पुलिस कर्मियों से मिलकर उलझा देता है, इस बात का ताज़ा उदाहरण छत्रपाल सिंह छब्बू नामक किसान ब्यापारी को टारगेट किया गया l मैं भी एक समाजसेविका हूँ अपनी पुरानी बस्ती में शराबखोरी, ड्रग्स की लत में झुझते परिवार को बहुत करीब से देखा है और मैं इस बात का पुरजोर विरोध करती हूँ, अभी मेरी एक सहेली जिसके साथ अभिषेक मिश्रा उर्फ़ नित्तू ने धोखाधड़ी ठगी की ज़मीन बेचीं, सराफ डॉक्टर के सामने मार्केट में साझेदारी के लिए पैसे लिए लगभग 49 लाख खाकर बैठा है, कोतवाली पुलिस ने एक साल से मुकदमा दर्ज नहीं किया, उसने जो किया मैंने देखा और अपनी सहेली गीता, राधा के साथ हूँ, गवाही में भी मेरा नाम है इसके चलते ही रंजिशन साजिश रचते हुए, मेरे इंजीनियरिंग की पढाई करने वाले बेटे का भविष्य खराब करने में तूला है, मैंने पुलिस को 2023 में ही ऐसा षङयंत्र रचने मुझे और मेरे परिवार को फ़साने की शंका जाहिर करते हुए थाना कोतवाली, पुलिस अधीक्षक, एडीजीपी शहडोल, डीजीपी भोपाल में सूचनार्थ एवं शिकायत की थी l अब घटना जो भी है सामने है पुलिस सबका डाटा निकाले सबसे पहले अभिषेक मिश्रा, रोशन यादव, अजीत यादव का और मृतिका रीना का हमने खुद ही सीडीआर मांगी है l सब दूध का दूध, पानी का पानी होगा l
माफिया की करतूत
मामले और कुछ नहीं अपनी दुश्मनी के लिए मृतिका का कन्धा इस्तेमाल किया जा रहा है, एक बात तो माननी पड़ेगी उसे लोमड़ी का दिमाग तो नहीं मिला, लेकिन उसकी परछाई डिग्री समझकर मल्टी माफ़िया चोर पुलिस का खेल खेलकर तो साबित कर दिया की शहर को सिंगल मैं ही चला रहा हूँ सब सरकारी वेतन पाने वाले गुलाम मैं महाराजा l तभी तो जिले में अबिलम एक बेगुनाह पर एफआईआर और एक दागदार को सालो पुलिसिया संरक्षण दिए जाने की बात समूचे जिले से लेकर अब सूबे की राजधानी और पुलिस हेड क़्वार्टर में गूंज रही है, दरअसल एक दागदार को इतना वेटेज देने के पीछे के क्या मायने है आला अफसरों को तलाशने होंगे l वरना शहर में ईमानदारी कौड़ियों के भाव हो चली है, और बेईमानी सर चढ़ कर अराजकता का माहौल निर्मित करने जद्दोजहद करती नजर आने में समय नहीं लगेगा l
यह रही पुलिस की विवेचना
स्थानीय पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक रीना ब्यौहारी में रहकर मास्टर ट्रेनर का कार्य करती थी, बीते दिनों वह लापता हो गई थी, परिजनो ने गुम इंसान दर्ज कराया था ब्यौहारी पुलिस उसकी तलाश कर रही थी जिसका शव चचाई गांव में स्थित सोन नदी में पानी में उतारता मिला है पुलिस ने मामले पर मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मामले में उसके घर से मोबाइल चालू मिला और स्कूटी सुसाइड नोट मिला, हालांकि परिजनों का कहना है कि उसकी हत्या कर उसके शव को वहां फेंका गया है हालांकि पुलिस ने पूरे मामले पर बारीकी से पड़ताल शुरू की है। जल्द ही मामले में असल बात सामने आएगी की उसने आत्महत्या की है तो किसके कारण की और हत्या है तो किसने उसकी हत्या की सामने होगा l
इन बिन्दुओ में होनी चाहिए जाँच
दरअसल इस अनसुलझे ममले में गौर करने वाली बात यह है की रीना 4 - 5 दिनों से थी लापता और घर पर मोबाइल मिला चालू, आखिरी फ़ोन कॉल हिस्ट्री, मोबाइल पर वाट्सअप कॉल, वीडियो कॉल, फेसबुक हिस्ट्री, कैमरा गैलरी, किसी दबाव में थी किसी न किसी को बताया होगा, नीलू पांडेय से कैसे बात होती थी, रीना की माँ की मोबाइल हिस्ट्री, उसके पिता की मोबाइल हिस्ट्री भी महत्वपूर्ण है, सूत्रों के मुताबिक एक जमीनी विवाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्ब में फसी जिसका मुआवजा भी एक वजह हो सकती है वही, हालही जब रीना पुरानी बस्ती से निकली तो उसकी जीपीएस लोकेशन, कॉल हिस्ट्री, पुलिस सर्विलांस कैमरे, आसपास के कैमरे खगालने से भी बड़ी सफलता मिल सकती हैl
इनकी भी सुने कोई
मैं प्रशासन से मांग करती हूँ रीना का मोबाइल जिसमे ब्योहारी में काम का लालच दिया गया और बुलाया गया, रीना की माँ की जानकारी में साडी चीज़ है उनके भी मोबाइल और उनके पापा जो उमरिया रहते है कॉल रिकॉर्डिंग हिस्ट्री खंगाले और आखिरी काल भी खंगाले। मेरे बेटे की सीडीआर एवं रीना की सीडीआर लोकेशन के साथ साथ अभिषेक मिश्रा एवं उनके साथियो की कॉल हिस्ट्री लोकेशन निकाली जाए। यह सब अभिषेक मिश्रा करा रहा है मुझे पहले ही शक था जिसकी पुलिस में सूचना पहले ही दे रखी है, पुलिस की विवेचना के पूर्व मेरे बेटे को हत्यारा साबित करने सोशल मीडिया में अपने गुर्गो से वायरल करा रहा है, मैं खुद चाहती हूँ सच्चाई सामने आये उसकी आत्महत्या या सुसाइड के पीछे क्या वजह है मैं भी जानकार रहूंगी । जरुरत पड़ी तो मैं सीबीआई जाँच तक जाउंगी।
नीलू पांडेय, समाज सेविका
शहडोल
पत्रकार संगठन प्रतिक्रिया
कोई कलमकार को प्रकाशन से पूर्व किसी पर आरोप प्रत्यारोप लगने वाली खबरो को लेकर सवपर्थम पुष्टि करना चाहिए साथ ही आरोप लगने वाला ब्यक्ति से उसका पक्ष भी जानना चाहिए, अखबार में प्रकाशित खबरों को पाठको द्वारा विश्वसनीय एवं सत्य मना जाता है अतः इस बात का ध्यान रखना जरुरीहोगा ।
विनय मिश्रा, जिला अध्यक्ष
एमपी वर्किंग जॉर्नलिस्ट यूनियन-शहडोल
किसी भी मामले में प्रेस से हमको इतनी छूट नहीं मिली की हम अर्थ का अनर्थ लिखे हमको अपनी हद मालूम होनी चाहिए, बिना सबूत लिख गया समाचार समाज में गलत सन्देश देता है, मामले में पूरी जानकारी आवश्यक है, सुप्रीम कोर्ट का आदेश हर पत्रकार को काम से काम पढ़ना चाहिए।
राहुल सिंह राणा, संभागीय अध्यक्ष
श्रमजीवी पत्रकार संघ, शहडोल
अगर किसी का व्यक्ति का पहले ही से कोर्ट कचहरी में मामला चल रहा है उसको टारगेट करने के पहले पत्रकारों को एक बार शिकायत को पढ़ने और समझने की आवस्यकता है, और अब तो सुप्रीम कोर्ट का भी सख्त निर्देश है। खबरों को जांचिए फिर लिखिए।
मनीष शुक्ला, संभागीय अध्यक्ष
मध्यप्रदेश संघ, शहडोल