झारखंड छात्र आंदोलन भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से शुरू हुआ आंदोलन
दिल्ली तक गूंज सरकार पर बढ़ा दबाव
रांची, रांची से शुरू हुआ झारखंड का छात्र आंदोलन अब राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन गया है यह आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहा है पिछले कई दिनों से हजारों अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और आसपास धरने पर बैठे हैं आंदोलन की गूंज अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है और विपक्ष केंद्र तथा राज्य सरकार के बीच इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि वर्षों की तैयारी के बाद भी उन्हें निष्पक्ष परीक्षा और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया नहीं मिल रही है उनका आरोप है कि (JPSC) झारखंड लोक सेवा आयोग और (JSSC) झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं जिससे योग्य उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की है छात्रों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं इनमें प्रमुख रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा रद्द करने के पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने (OMR) ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन शीट और उत्तर पुस्तिकाओं को सार्वजनिक करने वा दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने तथा भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग शामिल है शुरुआत में छात्र (CBI) क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट जांच की मांग कर रहे थे लेकिन बाद में उन्होंने झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की स्वतंत्र समिति से जांच कराने का भी प्रस्ताव रखा झारखंड का यह आंदोलन ऐसे समय में तेज हुआ है जब देशभर में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है छात्र संगठनों ने इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बताते हुए अन्य राज्यों के युवाओं से भी समर्थन मांगा है कांग्रेस भी पेपर लीक के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रही है जिससे झारखंड का आंदोलन दिल्ली की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है झारखंड में कांग्रेस, झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार की सहयोगी है कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि छात्रों की वास्तविक चिंताओं का समाधान होना चाहिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है हालांकि कांग्रेस सरकार में शामिल होने के कारण संतुलित रुख अपनाने की कोशिश कर रही है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार छात्रों की भावनाओं के प्रति संवेदनशील है और मामले को गंभीरता से ले रही है उन्होंने कहा कि सरकार के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा बढ़ते आंदोलन और विधानसभा सत्र से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात कर कानून-व्यवस्था और आंदोलन की स्थिति पर चर्चा की मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि सरकार जल्द आवश्यक कार्रवाई करेगी और पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है राज्य सरकार ने मामले की जांच झारखंड (CID) क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंटको सौंपी है जांच एजेंसियां कई स्थानों पर छापेमारी कर चुकी हैं और लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज तथा (OMR) ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है साथ ही जिला प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है और मुख्यमंत्री की ओर से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत का प्रस्ताव दिया गया है आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासन नहीं बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहिए यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उन्होंने विधानसभा का घेराव करने और आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी दी है दूसरी ओर सरकार बातचीत और जांच के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है ऐसे में आने वाले दिनों में यह आंदोलन झारखंड की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
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