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शाजापुर, यमुना जल में लहरें नाचें, लहरों पर शशि छाया, मुरली पर अंगुलियां नाचें, अंगुलियों पर माया...। सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर शहर के श्रीकृष्ण मंदिरों में सुबह से लेकर देररात तक इसी तरह की धुन सुनाई दी। वहीं मंदिरों में सोलह कलाओं तथा 64 विद्याओं के पारंगत, सुदर्शनधारी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव परंपरागत और उल्लासपूर्वक मनाया गया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह का माहौल रहा। उल्लेखनीय है कि जन्माष्टमी के मौके पर अल सुबह से लीलाधर श्रीकृष्ण के मंदिरों में दर्शन के लिए भक्त पहुंचने लगे थे और यह सिलसिला रात तक जारी रहा। साथ ही भक्तों ने श्याम सुंदर श्रीकृष्ण का विशेष श्रृंगार कर पूजन-अर्चन किया। इसी कड़ी में शहर के विभिन्न कृष्ण मंदिरों में आकर्षक सजावट की गई। गौरतलब है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की धूम पूरे शहर में रही और भक्त सुबह से लेकर रात तक श्रीकृष्ण की भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए। शहर के वजीरपुरा स्थित राधाकृष्ण मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, गुरुद्वारा स्थित श्रीकृष्ण मंदिर, खजांची मंदिर स्थित मंदिर, राठौर धर्मशाला कृष्ण मंदिर सहित अन्य मंदिरों में पूजा की गई। रात के समय मटकी फोड़ कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। वजीरपुरा स्थित गुरुद्वारे में सुबह के समय बाल गोपाल का अभिषेक हुआ। तत्पश्चात राधाकृष्ण का श्रंगार किया गया। वहीं रात 12 बजे केक काटकर मुरलीधर का जन्मोत्सव मनाया गया। इस वर्ष स्कूलों में भी जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
विभिन्न संस्थाओं में मनाया गया जन्माष्टमी का पर्व
राज्य शासन एवं कलेक्टर ऋजु बाफना के निर्देश पर शाजापुर जिले की विभिन्न शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। जन्माष्टमी पर जिले की शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं तथा शालाओं मे विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग, व्याख्यान का आयोजन हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में माखन मटकी फोडऩा, श्रीकृष्ण राधा का स्वांग बनाना, श्रीकृष्ण-राधा झांकी आदि का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, संस्था प्रमुखों शिक्षकों एवं बच्चों द्वारा सहभागिता की गई। वहीं शासकीय उत्कृष्ट उमावि में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया। इस दौरान शिक्षकों द्वारा छात्र-छात्राओं को भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंग के बारे में जानकारी दी गई। इस मौके पर कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सहित उनकी शिक्षाओं से सम्वन्धित संस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।