अयोध्या, राम मंदिर के कथित चंदा चोरी या दान गबन मामले को लेकर इस समय काफी चर्चा है लेकिन सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अभी तक जांच पूरी नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति को अदालत या जांच एजेंसी ने दोषी घोषित नहीं किया है इसलिए आरोप और सिद्ध तथ्य अलग-अलग हैं असल मे जून 2026 में आरोप सामने आए कि अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों में जमा होने वाली राशि के हिसाब-किताब में अनियमितताएं हुई हैं कुछ शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि दान की रकम और बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड में अंतर है तथा कुछ दान का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है हालांकि मंदिर निर्माण से जुड़े वित्तीय मामलों पर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं लेकिन वर्तमान विवाद जून 2026 में तब तेज हुआ जब कई शिकायतें सार्वजनिक हुईं और विपक्षी दलों ने भी जांच की मांग उठाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शिकायतों में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और कर्मचारियों के नामों का उल्लेख किया गया है कुछ रिपोर्टों में ट्रस्ट के महासचिव चंपात राय का भी नाम जांच के दायरे में बताए जाने का दावा किया गया है हालांकि अभी तक उनके खिलाफ कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ हैँ शिकायतकर्ताओं और कुछ पूर्व कर्मचारियों ने कथित वित्तीय गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया आरोप लगाए गए कि दान राशि के रिकॉर्ड सीसीटीवी फुटेज और गिनती प्रक्रिया में विसंगतियां हैं इन्हीं शिकायतों के बाद मामला सार्वजनिक बहस का विषय बना यह सबसे बड़ा सवाल है राम मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था बहुत कड़ी है लेकिन सुरक्षा का बड़ा हिस्सा आतंकवादी हमलों भीड़ नियंत्रण और परिसर की सुरक्षा के लिए होता है यदि किसी वित्तीय अनियमितता का आरोप सही पाया जाता है तो उसके संभावित कारण हो सकते है या तो नकद दान की गिनती प्रक्रिया में कमी,रिकॉर्ड रखने में लापरवाही,कर्मचारियों की निगरानी में कमजोरी,ऑडिट और सत्यापन की प्रक्रिया में अंतराल,
सीसीटीवी निगरानी और डेटा संरक्षण में कथित कमियां हालांकि जांच पूरी होने से पहले किसी कारण को अंतिम नहीं माना जा सकता मंदिरों में आने वाला अधिकांश दान नकद, सोना-चांदी और अन्य वस्तुओं के रूप में होता है जब कि बैंकिंग प्रणाली तभी लागू होती है जब राशि बैंक खाते तक पहुंचती हैँ विशेषज्ञों के अनुसार जोखिम वाले बिंदु दानपात्र खोलने की प्रक्रिया, नकदी की गिनती, बैंक में जमा करने तक का समय,बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड औऱ ऑडिट और मिलान यदि किसी स्तर पर नियंत्रण कमजोर हो तो गड़बड़ी की आशंका पैदा हो सकती है यह जांच का प्रमुख विषय है ट्रस्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नियमित ऑडिट चल रहे हैं और अब तक कोई महत्वपूर्ण गड़बड़ी सामने नहीं आई है ट्रस्ट का कहना है कि दान और खातों की निगरानी व्यवस्थित ढंग से होती है बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय एसआईटी S I T (स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ) गठित की है इस एसआईटी को प्रारंभिक और अंतिम रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया हैँ रिपोर्टों के अनुसार एसआईटी की अध्यक्षता मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं टीम में वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा हैं कि एसआईटी को कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं और जांच जारी है हालांकि अंतिम रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है क्योंकि राम मंदिर भारतीय राजनीति और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है अखिलेश यादव ने न्यायिक जांच और पारदर्शिता की मांग की विपक्ष सरकार पर जवाबदेही के सवाल उठा रहा है भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई होनी चाहिए ट्रस्ट और उससे जुड़े पक्ष आरोपों को राजनीतिक हमला बता रहे हैं औऱ वहीं चांदी और सोने की ईंटों का विवाद भी गर्माया है कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्षों में दान में मिली सोने-चांदी तथा अन्य बहुमूल्य धातुओं की ईंटों के रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं लगभग 1,250 बहुमूल्य ईंटों के गायब होने का दावा भी शिकायतों में किया गया है इन आरोपों की भी जांच की जा रही है अभी स्थिति देखते हुए वर्तमान मे यह है कि आरोप लगाए गए है एसआईटी जांच कर रही है ट्रस्ट आरोपों से इनकार कर रहा है पर विपक्ष जवाब मांग रहा हैँ जब कि अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है अभी किसी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं हुई है फिर भी राम मंदिर दान विवाद फिलहाल “आरोप बनाम जांच” की स्थिति में है यह कहना कि करोड़ों रुपये की चोरी निश्चित रूप से हुई या किसी विशेष व्यक्ति ने चोरी की अभी जांच पूरी होने से पहले कहना उचित नहीं होगा लेकिन इतना स्पष्ट है कि आरोप इतने गंभीर हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी जांच बैठानी पड़ी है और इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।