साधारण अमचूर पाउडर को ड्रग्स समझ कर एक निर्दोष व्यक्ति को 57 दिन जेल में रहना पड़ा
मप्र हाई कोर्ट ने दिया राज्य सरकार को 10 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश
भोपाल, भोपाल एयरपोर्ट पर हुई एक जांच ने इंजीनियर अजय सिंह की जिंदगी को अचानक बदल दिया। एक साधारण अमचूर पाउडर को ड्रग्स समझ लिया गया और एक निर्दोष व्यक्ति को 57 दिन जेल में रहना पड़ा बाद में जब सच्चाई सामने आई तो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर लापरवाही मानते हुए राज्य सरकार को 10 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया अजय सिंह पेशे से इंजीनियर थे वे अपने काम के सिलसिले में 7 मई 2010 को भोपाल एयरपोर्ट पहुंचे थे जहां से उन्हें दिल्ली की फ्लाइट पकड़नी थी एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान उनके बैग की स्कैनिंग की गई उसी समय बैग में रखा अमचूर पाउडर एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर मशीन में संदिग्ध पाया गया मशीन ने संकेत दिया कि यह पदार्थ हेरोइन या किसी प्रतिबंधित ड्रग्स जैसा हो सकता है। इसके बाद एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी बिना अंतिम वैज्ञानिक पुष्टि के अजय सिंह को हिरासत में लिया गया औऱ उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया अजय सिंह लगातार कहते रहे कि उनके बैग में सिर्फ अमचूर और मसाले हैँ लेकिन उनकी बात पर भरोसा नहीं किया गया जांच एजेंसियों ने मशीन की रिपोर्ट को ही आधार बना लिया मामले की सबसे बड़ी समस्या तब सामने आई जब जब्त पदार्थ की फोरेंसिक जाँच कराने की बारी आई उस समय मध्य प्रदेश में ऐसी आधुनिक फोरेंसिक सुविधा उपलब्ध नहीं थी जो तुरंत यह तय कर सके कि पदार्थ वास्तव में ड्रग्स है या नहीं इसी कारण सैंपल को जांच के लिए हैदराबाद की लैब भेजा गया जहाँ फोरेंसिक रिपोर्ट आने में पूरे 57 दिन लग गए और इस दौरान अजय सिंह जेल में बंद रहे आखिरकार जब रिपोर्ट आई तो उसमें साफ हो गया कि वह कोई ड्रग्स नहीं बल्कि साधारण अमचूर पाउडर था इसके बाद 2 जुलाई 2010 को अजय सिंह को जेल से रिहा कर दिया गया लेकिन तब तक उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, मानसिक स्थिति और निजी जीवन पर गहरा असर पड़ चुका था एक निर्दोष इंजीनियर को अपराधी की तरह जेल में रहना पड़ा इसके बाद अजय सिंह ने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुंचा कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि पूरे मामले में कई स्तर पर गंभीर लापरवाही हुई थी पहली गलती एयरपोर्ट जांच मशीन पर आंख बंद करके भरोसा करना था औऱ दूसरी गलती बिना अंतिम फोरेंसिक रिपोर्ट के कड़ी धाराओं में गिरफ्तारी करना रही तीसरी और सबसे बड़ी कमी राज्य की फोरेंसिक जांच व्यवस्था की थी जहां समय पर टेस्टिंग की सुविधा ही मौजूद नहीं थी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को व्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना कोर्ट ने राज्य की फोरेंसिक जांच व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच में देरी और तकनीकी कमियों की सजा किसी निर्दोष नागरिक को नहीं दी जा सकती हाई कोर्ट ने मई 2026 में अपना फैसला सुनाते हुए अजय सिंह को 10 लाख रुपये हर्जाना देने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि प्रशासनिक लापरवाही और कमजोर जांच व्यवस्था के कारण अजय सिंह को बेवजह 57 दिन जेल में रहना पड़ा यह मामला आज भी इस बात की मिसाल माना जा रहा है कि तकनीकी गलती, कमजोर फोरेंसिक सिस्टम और जल्दबाजी में की गई कार्रवाई किस तरह एक आम इंसान की जिंदगी को बर्बाद कर सकती है।
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