नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली में कूटनीति, वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई अहम घटनाक्रम सामने आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। वहीं, ब्रिक्स देशों ने 140 बिंदुओं वाली नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी देते हुए आतंकवाद, पहलगाम हमले, पश्चिम एशिया संकट, व्यापार, एकतरफा प्रतिबंध, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर साझा रुख जाहिर किया।

मोदी-जिनपिंग वार्ता में मतभेदों को विवाद से दूर रखने पर जोर
ब्रिक्स सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई। करीब सात साल बाद भारत आए जिनपिंग के साथ हुई इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रही। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें विवाद का रूप नहीं लेने दिया जाना चाहिए। सीमा पर शांति और स्थिरता को संबंधों में प्रगति के लिए अहम बताया गया। बातचीत में व्यापार, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति शृंखला, दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क और सीमा संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की क्षमताओं और अनुभवों से लाभ लेते हुए साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स के मंच पर दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता भी जताई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दोनों देश सीमा तनाव कम करने और द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार के प्रयास कर रहे हैं।

पुतिन से बातचीत, 2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी विस्तृत बातचीत की। इसमें रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री मार्गों पर पड़ रहे प्रभाव जैसे मुद्दे शामिल रहे। भारत ने संघर्षों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिक माध्यम बताया। काला सागर क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का विषय भी महत्वपूर्ण रहा। इसके साथ दोनों देशों ने आर्थिक संबंधों को नई गति देने पर चर्चा की और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई। पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को रूस यात्रा का निमंत्रण भी दिया।

एक कार में मोदी-पुतिन, तस्वीर ने खींचा ध्यान
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के एक साथ कार से सफर करने की तस्वीर भी चर्चा में रही। दोनों नेता भारत मंडपम परिसर में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के कार्यक्रम में एक ही कार से पहुंचे। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत-रूस संबंधों की निकटता के संदर्भ में इस तस्वीर को खास माना गया। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल संत तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भी भेंट किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पुस्तक दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और संपर्क को मजबूत करने में योगदान देगी।

पेजेश्कियन से पश्चिम एशिया और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों, ब्रिक्स में सहयोग और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की स्थिति पर विचार-विमर्श किया। भारत ने विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व को दोहराया। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया के संघर्ष का समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने के कारण ये विषय भारत के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद पर कड़ा रुख
सम्मेलन के पहले दिन सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि 140 बिंदुओं वाली नई दिल्ली घोषणा के रूप में सामने आई। लगभग 45 पन्नों के इस दस्तावेज में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, पश्चिम एशिया, ऊर्जा, वित्त और संयुक्त राष्ट्र सुधार समेत कई विषयों पर ब्रिक्स देशों की साझा सोच दर्ज की गई है। घोषणा में आतंकवाद के सभी स्वरूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की गई। सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले की भी स्पष्ट निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी। ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए आतंकियों और उनके समर्थकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पश्चिम एशिया संकट पर संयम और कूटनीति की अपील
ब्रिक्स घोषणा में पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हिंसा पर गंभीर चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने तथा विवादों का समाधान बातचीत, परामर्श और कूटनीति के माध्यम से करने की अपील की। गाजा में मानवीय सहायता जारी रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। ब्रिक्स ने 1967 की सीमाओं के आधार पर फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना वाले दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को दोहराया। एकतरफा सैन्य कार्रवाई की निंदा की गई, हालांकि किसी विशेष देश का नाम लेकर टिप्पणी नहीं की गई। मंच पर शी जिनपिंग ने भी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर चिंता व्यक्त की।

एकतरफा प्रतिबंधों और टैरिफ का विरोध
नई दिल्ली घोषणा में एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य देशों पर लगाए जाने वाले ऐसे उपायों पर चिंता जताई गई, जिनका असर विकास, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। ब्रिक्स ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं पर भी आपत्ति जताई। सदस्य देशों ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने का समर्थन किया। इससे समूह ने स्पष्ट संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को एकतरफा आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों से मुक्त रखने की जरूरत है।

डॉलर के विकल्प के बजाय स्थानीय मुद्राओं में भुगतान पर जोर
ब्रिक्स देशों ने आपसी व्यापार और भुगतान में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य सीमा पार भुगतान को अधिक तेज, किफायती, सुरक्षित और सुगम बनाना है। हालांकि सम्मेलन में किसी साझा ब्रिक्स मुद्रा की घोषणा नहीं हुई। इसके बजाय सदस्य देशों की अपनी-अपनी मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। ब्रिक्स भुगतान कार्यबल विभिन्न देशों की भुगतान और संदेश प्रणालियों को जोड़ने की संभावनाओं पर काम कर रहा है, जिससे व्यापार और निवेश को आसान बनाया जा सके।

यूएनएससी सुधार में भारत और ग्लोबल साउथ की भागीदारी पर जोर
ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की आवश्यकता का समर्थन किया। घोषणा में विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई। इसमें चीन और रूस की ओर से संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा के समर्थन का उल्लेख भी किया गया। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता सहित व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुधार की मांग करता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि ग्लोबल साउथ अनेक बड़े वैश्विक संकटों का सामना करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में उसकी भागीदारी अभी पर्याप्त नहीं है।

एआई, साइबर स्पेस और अंतरिक्ष में ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी
ब्रिक्स के एजेंडे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई भी प्रमुख विषय रहा। घोषणा में ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, विश्वसनीय, समावेशी और जिम्मेदार एआई विकास की वकालत की गई। भारत ने एआई के साथ साइबर स्पेस, अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों में विकासशील देशों की समान भागीदारी का मुद्दा उठाया। भारत का कहना रहा कि ये तकनीकें केवल आर्थिक अवसरों को प्रभावित नहीं कर रहीं, बल्कि भविष्य के वैश्विक नियमों को भी आकार दे रही हैं।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की पहल
नई दिल्ली घोषणा में भारत की कई पहलों को भी स्थान मिला। ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को साझा करने और इसके उपयोग को बढ़ाने की दिशा में सहयोग पर सहमति बनी। स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण संस्थानों तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क विकसित करने की पहल भी सामने आई। भारत में ब्रिक्स औद्योगिक दक्षता केंद्र स्थापित करने का स्वागत किया गया, जिसका उद्देश्य छोटी कंपनियों और विनिर्माण क्षेत्र को नई तकनीक अपनाने में मदद करना है। इसके अलावा विकास के अनुभव साझा करने के लिए ब्रिक्स और न्यू डेवलपमेंट बैंक के ज्ञान मंच को आगे बढ़ाने पर भी काम जारी रखने की बात हुई।

बिजनेस फोरम में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में व्यापार, निवेश, तकनीक और आर्थिक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विस्तारित ब्रिक्स में दुनिया की लगभग आधी आबादी रहती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा व्यापार में समूह की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। भारत ने ब्रिक्स को केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक आर्थिक सहयोग का प्रभावी मंच बनाने पर जोर दिया। कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, तकनीक, छोटे उद्योग, बुनियादी ढांचे और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कृषि, शहरी विकास और रोजगार पर नई पहल
भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के कृषि सहयोग को मजबूत करने के लिए कई प्रस्ताव सामने आए। टिकाऊ और प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र, डिजिटल कृषि नेटवर्क तथा खेती में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। शहरी विकास के क्षेत्र में ब्रिक्स अर्बन मोबिलिटी हब और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने की बात हुई। रोजगार, कौशल विकास, महिलाओं की भागीदारी और युवाओं से जुड़े सहयोग कार्यक्रम भी भारतीय अध्यक्षता के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहे।

गाला डिनर में भारतीय संस्कृति की झलक
सम्मेलन के पहले दिन का समापन भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित गाला डिनर के साथ हुआ। ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया। मेहमानों के लिए भारतीय व्यंजनों के साथ श्री अन्न यानी मोटे अनाज से तैयार पकवान भी परोसे गए। औपचारिक बैठकों के बीच यह आयोजन नेताओं को अनौपचारिक संवाद और भारतीय संस्कृति से परिचित होने का अवसर देने वाला रहा।

बरगद के पौधे से एकजुटता और स्थायित्व का संदेश
ब्रिक्स नेताओं ने सम्मेलन के दौरान बरगद का पौधा भी लगाया। इसकी मजबूत जड़ों और दूर तक फैली शाखाओं को निरंतरता, मजबूती और आपसी जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा गया। भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का फोकस भी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास पर है। ऐसे में पौधरोपण को सम्मेलन की व्यापक भावना से जोड़कर देखा गया।

2027 में चीन करेगा 19वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी
अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की मेजबानी चीन करेगा। चीन 2027 में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन करेगा। शी जिनपिंग ने कहा कि चीन ब्रिक्स देशों के साथ मिलकर पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता कायम करने में अपनी भूमिका निभाएगा।

पहले दिन भारत का कूटनीतिक और आर्थिक संदेश
नई दिल्ली में सम्मेलन के पहले दिन के घटनाक्रमों से भारत-चीन संबंधों में संवाद बहाली, रूस और ईरान के साथ रणनीतिक सहयोग तथा वैश्विक संकटों के समाधान के लिए कूटनीति पर भारत के जोर की तस्वीर सामने आई। साथ ही ब्रिक्स ने आतंकवाद, व्यापार, एकतरफा प्रतिबंध, स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन, एआई और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर सामूहिक रुख बनाने की कोशिश की।

नई दिल्ली घोषणा से यह भी संकेत मिला कि विस्तारित ब्रिक्स में सदस्य देशों के हित भले ही अलग-अलग हों, लेकिन आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि और वैश्विक शासन जैसे व्यापक मुद्दों पर साझा सहमति विकसित करने की कोशिश जारी है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स सहयोग को राजनीतिक चर्चाओं से आगे बढ़ाकर व्यापार, तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि और विकास जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया है।