भारत करेगा अंतरिक्ष में तैनात '52 आंखों वाला बाज'
हिले भी चीन-पाक तो सेना को मिल जाएगा डेटा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रक्षा बलों की ओर से अधिक सटीक निगरानी की आवश्यकता को महसूस करने के बाद, केंद्र सरकार ने 52 समर्पित निगरानी उपग्रहों (surveillance satellite) के प्रक्षेपण में तेज़ी लाने का आदेश दिया है. इससे तटीय और भूमि सीमाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी को बढ़ावा मिलेगा. इन सैटेलाइटों की लॉन्चिंग अगले साल (2026) से शुरू होगी और 2029 तक पूरी तैनाती पूरी कर ली जाएगी.
कब लगी थी प्रोजेक्ट पर मुहर
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अक्टूबर में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट समिति ने अगले दशक में अगली पीढ़ी के उपग्रहों के विकास हेतु SBS-III (Space-based surveillance) कार्यक्रम के लिए 3.2 बिलियन डॉलर की राशि को मंज़ूरी दी थी.
कौन बनाएगा सैटेलाइट
इस कार्यक्रम के तहत, इसरो पहले 21 उपग्रहों का निर्माण और प्रक्षेपण करेगा, जबकि निजी कंपनियां शेष 31 उपग्रहों का संचालन करेंगी. रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) नए लॉन्च किए गए उपग्रह प्रणाली के संचालन की देखरेख करेगी.
किस काम आएंगे उपग्रह
ये उपग्रह भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की सहायता करेंगे और दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने में मदद करेंगे.
निर्माण में तेजी लाने का आदेश
टीओआई ने एक सूत्र के हवाले से बताया, उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा और भूस्थिर कक्षा में तेज़ी से प्रक्षेपित करने के लिए समयसीमा को कम करने पर काम चल रहा है. जिन तीन निजी कंपनियों को ठेके मिले हैं, उन्हें उपग्रहों के निर्माण में तेज़ी लाने के लिए कहा गया है.
हिंद महासागर पर भी होगी नजर
SBS-3 का लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र के साथ-साथ चीन और पाकिस्तान के बड़े क्षेत्रों को कवर करना है, और इसका पुनरीक्षण समय कम होगा और इसका रिज़ॉल्यूशन बेहतर होगा.
क्षेत्रीय खतरों का जवाब
उपग्रहों की तैनाती की तात्कालिकता आंशिक रूप से चीन की बढ़ती सैन्य अंतरिक्ष क्षमताओं के कारण है. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इसके उपग्रह बेड़े की संख्या 2020 में 36 से बढ़कर 2024 तक 1,000 से अधिक हो गई है, जिसमें 360 उपग्रह केवल खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) पर केंद्रित हैं.
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