सहारनपुर में शव आसन से मिलती नई ऊर्जावान जिंदगी
२४ घंटे को २९ बना देना अपने हाथ में है
CURATED BY – GAURAV SINGHAL | CITYCHIEFNEWSसहारनपुर, जी हां नई जिंदगी मरने के बाद ही नहीं मिलती, मृत आसन करने के बाद भी मिल जाती है। गीता तो कहती है कि मरने वाले का जन्म और जन्मने वाले का मरण ध्रुव निश्चित है और मृत्यु के बाद जीव इसी प्रकार नया शरीर धारण करता है जैसे हम जीर्ण वस्त्र को उतारकर नए वस्त्र धारण कर लेते हैं। लेकिन योग की यह सच्चाई है कि शव आसान का अभ्यास इंसान को नई जिंदगी देता है और वह भी उत्साह व सकारात्मकता से भरी हुई! यह कहना है देश के पहले पद्मश्री से सम्मानित योगी गुरु भारत भूषण का जो बेरीबाग स्थित मोक्षायतन योग संस्थान में साधकों और नेशन बिल्डर्स अकादमी के छात्रों के लिए चल रही योग एवं उपयोग कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आधे घंटे का शव आसन 3 घंटे की नींद के बराबर और 20 मिनट का सघन ध्यान 5 घंटे की नींद के बराबर आराम देता है! यानी हम प्रतिदिन श्वासन करने से इसके अन्य लाभों के अलावा 3 घंटा और ध्यान करने से 5 घंटा प्रतिदिन अपने वर्किंग अवर्स ऐसे बढ़ा सकते हैं कि दिन के २४ घंटे २९ घंटे बन जाए। आज छोटे बच्चों को गहरे शव आसन में देख सभी हतप्रभ रह गए! शव आसन इतना गहरा था कि बाहर के शोर का भी उन पर कोई असर नहीं था, इस पर योग गुरु ने कहा कि बच्चों व साधकों के झूठ फरेब वह आडंबर मुक्त जीवन के कारण ही अभ्यास का ऐसा गहरा असर हो पता है, जबकि आमजन के लिए यम व नियम का अलग प्रशिक्षण देकर उनकी मानसिकता को अभ्यास के अनुरूप बनाना होता है। योगगुरु ने कहा कि योगाभ्यास के लिए खर्च किया गया समय एक ऐसा इन्वेस्टमेंट है जो कई गुना होकर हमें मिलता है और साथ में सकारात्मक ऊर्जा उत्साह और खूबसूरती बोनस में मिल जाते हैं। उन्होंने इस विशेष शिविर के माध्यम से संक्रामक साधक बनने का आवाहन किया और कहा कि अपने आचरण, दृष्टिकोण, गुणवत्ता और मुस्कुराहट भरी सेवा से उन्हें अन्य अनेकों के लिए प्रेरणा स्रोत बने की मिसाल कायम करनी होगी। उन्होंने कहा कि एक बार अच्छा काम कर गुजरने से उत्साहित होकर हमें संतुष्ट नहीं हो रहने के बजाय आगे के लिए नए लक्ष्य स्थापित करने चाहिए। उन्होंने अविरल बहती गंगा के उदाहरण से कहा कि निरंतरता आत्मा का और योगी का स्वभाव है। मोक्षायतन योग संस्थान के भारत योग अभियान से जुड़े साधकों को भी उन्होंने अगले लक्ष्य को पाने में और अधिक उत्साह से जुटने की प्रेरणा दी। जिससे दवाइयों पर निर्भरता घटे, अज्ञान का अंधेरा छंटे और समाज न बंटे। उन्होंने कहा कि तन-मन की सेहत और सह अस्तित्व के लिए योग सदियों से चला आ रहा स्थापित रास्ता है जिसे आज पूरी दुनिया में अपना लिया है। योगी भारत भूषण ने स्कूली बच्चों को ध्यान का अभ्यास भी कराया और बताया कि ध्यान हास की के सर्वोच्च अवस्था है जिसमें हंसी का शोर तो नहीं होता लेकिन हमारा रोम-रोम पुलकित हो उठता है। कार्यशाला में वरिष्ठ योगाचार्य डॉक्टर अशोक गुप्ता, अनीता शर्मा, सीमा गुप्ता, विजय सुखीजा, प्रदीप कांबोज प्रशिक्षक यश राणा, योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन अध्यक्ष नंदकिशोर शर्मा आदि भी मौजूद रहे।