सिटी चीफ की खबर का असर
शिक्षा विभाग हरकत में, सरकारी किताबों की जांच शुरू
आलोट, कक्षा 5वीं एवं 8वीं के विद्यार्थियों को शासन द्वारा निर्धारित अनिवार्य सरकारी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराए जाने के मामले में सिटी चीफ में समाचार प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया। विभाग ने तत्काल जांच दल गठित कर नगर के निजी विद्यालयों और पुस्तक विक्रेताओं के यहां सघन जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान 9 निजी विद्यालयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 3 विद्यालयों में निर्धारित सरकारी पुस्तकें उपलब्ध नहीं मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। वहीं नगर के सभी प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर पहुंचकर रेट लिस्ट, सरकारी पुस्तकों की उपलब्धता और बिक्री व्यवस्था की भी जांच की गई।
शासन के निर्देशानुसार कक्षा 5वीं एवं 8वीं में केवल निर्धारित सरकारी पाठ्यपुस्तकों के आधार पर अध्ययन एवं परीक्षा कराई जानी है, लेकिन कुछ निजी विद्यालयों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें संचालित किए जाने तथा विद्यार्थियों को महंगी किताबें खरीदने के लिए प्रेरित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। इस गंभीर विषय को सिटी चीफ ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। समाचार के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की।
जांच दल में विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिलीप शर्मा, विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक (जनपद शिक्षा केंद्र) प्रहलाद सरोनिया, बीएसी मुकेश कुमार प्रधान, जन शिक्षक राजेश कुमार जोशी एवं जन शिक्षक गोपाल सोलंकी शामिल रहे। दल ने विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों की पुस्तकों, स्कूलों द्वारा जारी पुस्तक सूची, अध्ययन सामग्री तथा शासन द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का बारीकी से निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान तीन विद्यालयों में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की अनिवार्य सरकारी पुस्तकें उपलब्ध नहीं मिलने पर संबंधित विद्यालय संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। अधिकारियों ने निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने अथवा दोबारा अनियमितता पाए जाने पर मान्यता संबंधी प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर भी जांच
शिक्षा विभाग की कार्रवाई केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं रही। जांच दल नगर के सभी प्रमुख पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर भी पहुंचा। यहां अधिकारियों ने सरकारी पुस्तकों की उपलब्धता, मूल्य सूची (रेट लिस्ट) तथा बिक्री व्यवस्था का निरीक्षण किया। यह भी देखा गया कि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक राशि तो नहीं वसूली जा रही और शासन द्वारा स्वीकृत पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बेचने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा। अधिकारियों ने सभी पुस्तक विक्रेताओं को रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित रखने तथा शासन के निर्देशों के अनुरूप ही पुस्तकें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अभिभावकों को मिलेगी राहत
विभागीय कार्रवाई के बाद अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि अब विद्यार्थियों को समय पर शासन द्वारा निर्धारित पुस्तकें उपलब्ध होंगी और उन्हें निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। विभाग ने सभी निजी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी विद्यार्थी या अभिभावक पर किसी विशेष प्रकाशक की पुस्तकें खरीदने का दबाव न बनाया जाए तथा केवल शासन द्वारा स्वीकृत पाठ्यक्रम का ही पालन सुनिश्चित किया जाए।
वर्जन
"नगर के 9 निजी विद्यालयों का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 3 विद्यालयों में कक्षा 5वीं एवं 8वीं की निर्धारित सरकारी पुस्तकें नहीं मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही नगर के सभी पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर पहुंचकर रेट लिस्ट एवं पुस्तकों की भी जांच की गई है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।"
— प्रहलाद सरोनिया, विकासखंड स्त्रोत केंद्र समन्वयक, जनपद शिक्षा केंद्र, आलोट
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