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लालबर्रा | बालाघाट, इस्लामी साल का पहला महिना, मोहर्रम जिसकी 10 तारीख को याने कि 17 जुलाई को यौमे आशुरा के दिन हजरत इमाम हसन हुसैन वह उनके 72 जानिसारों को याद किया जाएगा। उक्ताशय जानकारी देते हुए राजा मस्जिद अमोली सदर हाजी अनवर यासिनी ने बताया कि इस्लामी साल के पहले दिन से ही रजा मस्जिद में हजरत इमाम हसन हुसैन वह उनके फरजंदो को मिलाद तकरीर के माध्यम से याद किया जा रहा है, इसी परिपेक्ष में यौमें आशुरा यानी की दसवीं तारीख को सुबह 9:00 मस्जिद में असुरा की दुआ की जाएगी। श्री यासिनि ने बताया कि कोरोना बीमारी के चलते विगत 3 वर्षों से स्टैंड एवं मजरे पाक के सारे प्रोग्राम स्थगित कर दिए गए हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आशुरा के दिन का ऐतिहासिक महत्व है। यौमे आशुरा इस्लामिक तारीख के मुताबिक बहुत ही फजीलत और अजमत वाला दिन है, क्योंकि यौमे आशुरा के दिन ही हजरत आदम की दुआयें कबूल हुई, इसी दिन हजरत नूह की कश्ती जूदी पहाड़ी के किनारे लगी। इसी दिन हजरत इब्राहिम पर आग, गुलजार हुई और इसी दिन हजरत ईसा आसमान पर उठा लिए गए तथा इसी दिन हजरत ईमाम हुसैन और उनके 72 जानिसार की कर्बला में शहादत हुई थी। यौमे आशुरा के रोजे का भी अत्यंत महत्व हैं। इसलिए मुस्लिम धर्मावलंबी रोजे का ऐहतेमाम करते है और शहीदाने कर्बला की याद में नगपुरा, निलजी, बोरी व बघोली सहित अन्य जगहों पर शरबत तथा खिचड़ा सहित लंगर का भी इंतजाम किया जाता है।