CURATED BY – GAURAV SINGHAL | CITYCHIEFNEWS

देवबंद (सहारनपुर)। देवबंद क्षेत्र के आदर्श गांव मिरगपुर में गुरु बाबा फकीरादास की प्राचीन अष्टधातु की मूर्ति उनकी सिद्धकुटी में पूरे विधि- विधान के साथ स्थापित करा दी गई है। गुरु बाबा फकीरादास की यह प्राचीन अष्टधातु की मूर्ति मुजफ्फरनगर के एक सर्राफ के पास मौजूद थी। जिसे उन्होंने करीब 20 वर्ष पूर्व एक कबाड़ी से खरीदा था। मुजफ्फरनगर निवासी सर्राफ संदीप रस्तौगी गुरु बाबा फकीरादास जी की इस अष्टधातु की मूर्ति लेकर गांव मिरगपुर में पहुंचे और उसे मंदिर के महंत बाबा कालूदास को सौंप दिया। संदीप रस्तौगी ने बताया कि उन्होंने कबाडी से मूर्ति खरीदने के बाद कई बार उसे गलाने का प्रयास किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। जिसके बाद उन्होंने मूर्ति को अपने घर में ही रख लिया। कुछ दिन पूर्व उनके सपने में बाबा आए और मूर्ति को उसके स्थान पर पहुंचने को कहा। अनुमान लगाया जा रहा है कि यह मूर्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है। वहीं इस मूर्ति को सिद्धकुटी से कौन व्यक्ति कब और कितने वर्ष पूर्व लेकर गया था इसकी जानकारी ग्रामीणों को भी नहीं है। सिद्धकुटी में बाबा की इस प्राचीन मूर्ति को विधि- विधान के साथ ग्रामीणों द्वारा स्थापित करा दिया गया। इस अवसर चौधरी विरेंद्र सिंह गुर्जर, गजराज सिंह राणा, शकूरा प्रधान, बिजेंद्र गुप्ता, शिवकुमार, मोहित,
रूपेंद्र गुर्जर, वरिष्ठ गुर्जर, विशाल पंवार आदि मौजूद रहे। मिरगपुर गांव की देशभर में अपनी एक अलग ही पहचान है। मिरगपुर गांव देवबंद तहसील का अकेला ऐसा गांव है जिसका नाम लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है। गुरु बाबा फकीरा दास करीब 500 वर्ष पूर्व जब गांव में आए थे तो उन्होंने ग्रामीणों को तामसिक वस्तुओं से दूर रहने की शपथ दिलाई थी। गांव के लोग मदिरा, सिगरेट, लहसुन, प्याज जैसी तामसिक वस्तुओं का बाबा द्वारा प्रतिज्ञा दिलाने के बाद से परहेज करते चले आ रहे हैं। प्रशासन द्वारा भी मिरगपुर गांव को शुद्ध शाकाहारी होने का प्रमाण पत्र दिया हुआ है। गांव में बाबा की सिद्धकुटी पर प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की पहली दशमी तिथि को मेला लगता है। जिसे ग्रामीण उत्सव की तरह मानते हैं। ग्रामीणों के सभी रिश्तेदार व चिर-परिचित इस मेले में सिद्धकुटी पर आकर बाबा के दर्शन कर प्रसाद चढाते हैं।