CURATED BY – GAURAV SINGHAL | CITYCHIEFNEWS

देवबंद | सहारनपुर, 18 वीं लोकसभा के पहले चरण के 19 अप्रैल को होने वाले मतदान वाली पहली लोकसभा सीट सहारनपुर का देवबंद एक प्रमुख शहर है जो देवबंदी मसलक के मुसलमानों के इस्लामिक शिक्षण केंद्र दारूल उलूम देवबंद के नाम से विश्वभर में विख्यात है। खास बात यह है कि देवबंद निवासी किसी भी राजनीतिक व्यक्ति को लोकसभा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिला। यह अलग बात है कि मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संस्था जमीयत उलमाए हिंद जिसने आजादी की लड़ाई में गांधी और कांग्रेस का साथ दिया और भारत बंटवारे का एवं मुस्लिम लीग का पूरी ताकत से विरोध किया। उसके एक नेता स्वर्गीय मौलाना असद मदनी को कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश से तीन बार राज्य सभा का सदस्य बनाया और उनके बेटे महमूद मदनी सपा-रालोद से 2006 से 2012 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। इसी परिवार के महमूद मदनी और उनके भाई उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटों अमरोहा इत्यादि से चुनाव लड़ चुके हैं। इसी परिवार के मसूद मदनी ने बेशक पिछला विधानसभा चुनाव असुद्दीन औवेसी की पार्टी से चुनाव लड़ा था। जिसमें पूरी तरह से हार का मुंह देखना पड़ा था। इस बार देवबंद क्षेत्र के निवासी और जिला पंचायत सदस्य मुस्लिम गाडा बिरादरी के माजिद अली बहुजन समाज पार्टी के सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाए गए हैं। जिनका मुकाबला सपा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार इमरान मसूद और भाजपा उम्मीदवार राघव लखनपाल शर्मा से है। ध्यान रहे  1977 से 2019 तक 12 लोकसभा चुनाव हुए हैं। जिनमें सबसे ज्यादा पांच बार रशीद मसूद लोकसभा सदस्य चुने गए। इस बार कांग्रेस से ताल ठोंक रहे इमरान मसूद इन्हीं रशीद मसूद के भतीजे हैं। 12 लोकसभा चुनावों में सात बार मुस्लिम सांसद निर्वाचित हुए हैं। 2019 में फजर्लुरहमान कुरैशी और 1999 में मंसूर अली खान दोनों बसपा से सांसद चुने गए थे। भाजपा तीन बार चुनाव जीती है।1996 और 1998 में चौधरी नकली सिंह और 2014 में राघव लखनपाल शर्मा जीते थे। बसपा भी तीन बार चुनाव जीती है।2009 में जगदीश राणा ने इस पार्टी से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस पार्टी केवल एक बार 1984 में ही जीत दर्ज कर पाई है। जब उसके उम्मीदवार चौधरी यशपाल सिंह ने रशीद मसूद को पराजित कर चुनाव जीता था। देखना है कि इस चुनाव में क्या पहली बार देवबंद को लोकसभा में प्रतिनिधित्व मिल पाएगा।