CURATED BY – ASHWINI WALIA | CITYCHIEFNEWS

कुरुक्षेत्र, सूचना का अधिकार का तात्पर्य है सूचना पाने का अधिकार, सरकार ने आम आदमी के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) लागू भी कर दिया लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सूचना के अधिकार का खुलेआम उल्लंघन करते देखे जा सकते है। जिम्मेदार अधिकारी आरटीआई में जानकारी देने से बचते है और अगर कोई आवेदक अपील में चला जाए तो यह अधिकारी आधी अधूरी जानकारी दे कर अपना पल्ला झाड़ लेते है | आरटीआई में जानकारी लेने वाला कितने कष्ट में है इसका ताज़ा मामला मुख्यमंत्री की कर्मभूमि के जन स्वास्थ्य एवं अभियान्त्रिकी विभाग से जुड़ा है | विभाग के बेखौफ अधिकारी कैसे एक आरटीआई एक्टिविस्ट से 80 हजार रपये जमा करवाने के बाद भी पूरी जानकारी नही दे रहे | आरटीआई एक्टिविस्ट अरोड़ा बताते है की उन्होंने 30 जनवरी 25 को अधीक्षक अभियंता जन स्वास्थ्य एवं अभियान्त्रिकी विभाग कुरुक्षेत्र में सरकारी नियमानुसार आरटीआई लगाई थी जिसके लिए नियमानुसार सरकारी फ़ीस का पोस्टल आर्डर भी लगाया था | जन स्वास्थ्य एवं अभियान्त्रिकी विभाग कुरुक्षेत्र ने 3 फरवरी को उन्हें दो पत्र एक ही दिन में लिख दिए जिनके रेफरेंस नंबर अलग अलग थे | एक पत्र में उन्होंने सुचना देने के नाम पर 85000/- मांग लिए उसी दिन के दुसरे पत्र में उन्होंने अपने विभाग के अधिकारीयों को निर्देश दिए की तय समय सीमा में सुचना उपलब्ध करवाए और सुचना के लिए कितने पैसे जमा करवाने है वो भी बताया जाए | कमाल की बात तो यह है दोनों पत्र एक ही दिन लिख दिए जो अपने आप में ही अजूबा है सरकारी अधिकारी कानून को अपने हिसाब से कैसे तोड़ते है यह इनके हाथ में है | आवेदक ने भी हार न मानते हुए विभाग में 14 फरवरी 25 को 10 हजार रपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करवा कर विभाग को पत्र के माध्यम से निवेदन किया की पैसे किस हिसाब से मांगे है कृपया बताया जाए | लेकिन विभाग के अधिकारियो के कान पर जूं नही रेंगी और विभाग ने पत्र लिखा की बकाया पैसे जमा करवाए | कानून तोड़ने वाले अधिकारीयों से हार कर प्राथी ने 70 हजार 5 मार्च 25 को बैंकर चेक बनवा कर जमा करवा दिया | लेकिन विभाग ने पैसे लेने के बाद भी सुचना उपलब्ध नही करवाई आवेदक ने फिर भी हार नही मानी और महामहिम राज्यपाल , मुख्यमंत्री हरियाणा , मुख्य सचिव हरियाणा , इंजिनियर इन चीफ व अन्य अधिकारीयों को फरियाद की विभाग के अधिकारी सुमित गर्ग आरटीआई नही देना चाहते लेकिन अधिकारी पैसे जमा करवाने के बाद भी सुचना नही देना चाहते थे | क्योकि अगर विभाग पूरी सुचना उपलब्ध करवा देता है तो उसमे बहुत बड़ा घपला सामने आ सकता है | पंकज अरोड़ा ने बताया विभाग के अधिकारी कितने बेखौफ की 80 हजार लेने के बाद उसे विभाग के खाते में तय समय सीमा में जमा नही करवाया जिसकी पुष्टि बैंक ने की है | उन्होंने इस सारे मामले की जानकारी उपायुक्त कुरुक्षेत्र को दी तो उन्होंने विभाग के अधिकारी सुमित गर्ग को सख्त आदेश लिखित एवं मौखिक दिए उपायुक्त कुरुक्षेत्र के आदेशो के बाद भी उक्त अधिकारी सुचना नहीं देना चाहता था | प्राथी ने इसकी शिकायत समाधान शिविर में 2 बार दी तो मुख्यमंत्री कार्यालय से फोन आया तो इस अधिकारी ने आनन् फानन में आधी अधूरी सुचना 6 जून को दी और बाकि सूचनाओ के जवाब को गोल गोल घुमा दिया | आवेदक ने भी हार न मानते हुए मुख्य सुचना आयुक्त के दरबार में शरण ली है जहाँ उसकी अपील स्वीकार कर ली गयी है | आवेदक पंकज अरोड़ा ने बताया की अधीक्षक अभियंता जन स्वास्थ्य एवं अभियान्त्रिकी विभाग कुरुक्षेत्र ने जो सुचना देने के नाम पर जो फ़ीस जमा करवाई थी उसे विभाग के खाते में जमा नही करवाया जिसकी पुष्टि बैंक ने की है | बता दें की डिमांड ड्राफ्ट और बैंकर चेक की मियाद 3 माह की होती इसके बाद उसकी मियाद ख़त्म हो जाती | यक्ष प्रशन यह है की अगर विभाग के खाते में सुचना देने की फ़ीस जमा ही नही होनी थी तो अधिकारी ने पत्र क्यों लिखा | बड़ा सवाल यह भी है की विभाग द्वारा 37 हजार से ज्यादा पेजों की सुचना देने का दावा किया जा रहा है तो उसकी फोटोस्टेट के पैसे किसने दिए है | इस सारे मामले की अगर जाँच हो गयी तो विभाग मुश्किल में आ सकता है |