कर्नाटक में डीके शिवकुमार कैबिनेट का पहला विस्तार
19 मंत्रियों ने ली शपथ; एक पद अब भी खाली
बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सरकार ने सोमवार को अपने मंत्रिमंडल का पहला विस्तार करते हुए 19 कांग्रेस विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री बनने के लगभग दो महीने बाद हुए इस विस्तार के दौरान राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बेंगलुरु स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। हालांकि कांग्रेस आलाकमान की ओर से स्वीकृत 20 नामों में शामिल एकमात्र महिला नेता गायत्री शांतेगौड़ा शपथ ग्रहण नहीं कर सकीं, जिससे कैबिनेट में फिलहाल एक पद रिक्त रह गया है।
नवनियुक्त मंत्रियों में एन. चेलुवरायस्वामी, बसवराज रायरेड्डी, लक्ष्मण सावदी, मधु बंगारप्पा, एसएस मल्लिकार्जुन, बी. नागेंद्र, एचसी बालकृष्ण, केएस बसवन्तप्पा, डॉ. अजय सिंह, पीएम नरेंद्रस्वामी, सी. पुत्तरंगा शेट्टी, टीआर रघुमूर्ति, रिजवान अरशद, शिवराज तंगडागी, रुद्रप्पा लमानी, बीजेड जमीर अहमद खान, संतोष लाड, केएम शिवलिंगे गौड़ा और विजयानंद कशप्पनवर शामिल हैं।
गायत्री शांतेगौड़ा ने क्यों नहीं ली शपथ?
कैबिनेट विस्तार के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने 20 नेताओं के नामों को अंतिम मंजूरी दी थी, जिनमें गायत्री शांतेगौड़ा का नाम भी शामिल था। हालांकि वह हाल ही में चिकमगलूर स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से कर्नाटक विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुई हैं और अभी तक परिषद सदस्य के रूप में औपचारिक शपथ नहीं ले सकी हैं। संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वह मंत्री पद की शपथ ग्रहण नहीं कर पाईं। इस वजह से मंत्रिमंडल में एक पद फिलहाल खाली है। नियमों के अनुसार मुख्यमंत्री सहित कर्नाटक में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं।
मंत्री बनने के बाद क्या बोले नरेंद्रस्वामी?
शपथ ग्रहण के बाद मंत्री बने पीएम नरेंद्रस्वामी ने कहा कि मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन को मजबूत बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उनके अनुसार कांग्रेस का लक्ष्य वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में दोबारा सत्ता हासिल करना है, जबकि 2029 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनते देखना पार्टी कार्यकर्ताओं की प्राथमिक आकांक्षा है।
कैबिनेट विस्तार से पहले ही उभरा असंतोष
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले कांग्रेस के कई नेताओं ने मंत्री पद नहीं मिलने पर नाराजगी जताई थी। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सभी विधायकों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा था कि सभी को एक साथ मंत्रिमंडल में शामिल करना संभव नहीं है और भविष्य में अन्य नेताओं को भी अवसर दिया जाएगा।
इसके बावजूद इंदी विधानसभा क्षेत्र के विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया। उनके समर्थकों ने विधानसभा परिसर और विधान सौध के बाहर प्रदर्शन कर नारेबाजी भी की।
इन संवैधानिक पदों पर भी बनी सहमति
कांग्रेस नेतृत्व ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए जीएस पाटिल, उपाध्यक्ष के लिए ए.एस. पोन्नन्ना, विधान परिषद के सभापति के लिए सलीम अहमद तथा उपसभापति के लिए उमाश्री के नामों को भी मंजूरी दे दी है।
वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी से बढ़ी चर्चा
कैबिनेट विस्तार में कई अनुभवी नेताओं को जगह नहीं मिली। इनमें एचसी महादेवप्पा, एचके पाटिल, दिनेश गुंडू राव, के. वेंकटेश, एमसी सुधाकर और लक्ष्मी हेब्बालकर जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। इन नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर रखे जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आगे भी जिम्मेदारियों का वितरण किया जाएगा। ऐसे में कैबिनेट विस्तार के बाद सरकार के सामने प्रशासनिक कामकाज को गति देने के साथ-साथ पार्टी के भीतर संतुलन और एकजुटता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी।
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