एमवाय अस्पताल के फार्मासिस्ट पर आय से अधिक संपत्ति का मामला
ईओडब्ल्यू की जांच में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा
इंदौर। इंदौर के एमवाय अस्पताल में पदस्थ एक फार्मासिस्ट के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई में प्रारंभिक जांच के दौरान अधिकारी के पास घोषित आय की तुलना में 108 प्रतिशत नहीं, बल्कि 108 गुना अधिक संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। जांच में कई प्लॉट, बैंक दस्तावेज और नकदी सहित अन्य संपत्तियों का खुलासा हुआ है।
दवाइयों की खरीद में अनियमितता की शिकायत के बाद कार्रवाई
ईओडब्ल्यू को शिकायत मिली थी कि एमवाय अस्पताल में दवाइयों की खरीद प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की जा रही है। शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई और संबंधित अधिकारी के निवास सहित अन्य स्थानों पर तलाशी ली गई।
फार्मासिस्ट के घर से मिले संपत्ति से जुड़े दस्तावेज
जांच एजेंसी ने एमवाय अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट राकेश गोरखे, निवासी स्कीम नंबर-140, वृंदावन कॉलोनी के घर पर छापामार कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में छह संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज, बैंक पासबुक और 1.51 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
आय और संपत्ति में बड़ा अंतर
ईओडब्ल्यू के अनुसार, राकेश गोरखे की सरकारी सेवा वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। जांच के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर अब तक उनकी कुल वैध आय लगभग 1.11 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि उनके पास उपलब्ध संपत्तियों और निवेश का मूल्य 2.13 करोड़ रुपये से अधिक पाया गया। एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक मूल्यांकन में उनकी संपत्ति आय की तुलना में 108 गुना अधिक होने के संकेत मिले हैं, जिसकी विस्तृत वित्तीय जांच जारी है।
वेतन वृद्धि और विदेश यात्रा भी जांच के दायरे में
जांच में सामने आया कि वर्ष 2015 में राकेश गोरखे का मासिक वेतन करीब 18,700 रुपये था, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 54,600 रुपये हो गया। ईओडब्ल्यू यह भी जांच कर रही है कि आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति कैसे अर्जित की गई। अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में उनकी थाईलैंड यात्रा की जानकारी भी जांच के दायरे में शामिल की गई है।
पत्नी भी शासकीय कर्मचारी
जांच में यह भी सामने आया कि राकेश गोरखे की पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं। उनका वर्तमान मासिक वेतन लगभग 42,400 रुपये बताया गया है। जांच एजेंसी दोनों की आय, निवेश और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
दस्तावेजों की गहन जांच जारी
ईओडब्ल्यू का कहना है कि जब्त किए गए सभी दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति अर्जित करने में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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