नीट आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
संसद पहुंचने पर NDA सांसदों ने किया जोरदार स्वागत
नई दिल्ली, धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2026 में देशव्यापी छात्र आंदोलन नीट -युजी पेपर लीक विवाद और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया छात्र संगठनों और 'कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन की प्रमुख मांगों में उनका इस्तीफा भी शामिल था अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया जिसके बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित करने और संसद में कड़े कानून लाने की घोषणा की इस्तीफे के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद भवन पहुंचे तो राजनीतिक माहौल काफी अलग दिखाई दिया संसद परिसर में एनडीए के सांसदों ने उनका जोरदार स्वागत किया"धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद" के नारे लगे और कई सांसदों ने उनसे हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि मंत्री पद छोड़ने के बावजूद पार्टी नेतृत्व और सांसदों का भरोसा उन पर कायम है वहीं विपक्षी दलों ने इस स्वागत का विरोध किया और कहा कि परीक्षा घोटाले जैसी गंभीर घटना के बाद इस तरह का अभिनंदन उचित नहीं है धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा इसलिए देना पड़ा क्योंकि NEET-UG 2026 पेपर लीक ने करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा परीक्षा व्यवस्था से हिला दिया था आंदोलन केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहा बल्कि जवाबदेही पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का राष्ट्रीय अभियान बन गया सरकार ने शुरुआत में उनका बचाव किया लेकिन आंदोलन के लगातार फैलने और राजनीतिक दबाव बढ़ने के बाद अंततः इस्तीफा स्वीकार किया गया इस घटनाक्रम का सरकार पर भी गहरा प्रभाव पड़ा यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की उन दुर्लभ घटनाओं में माना गया जब लगातार जन दबाव के कारण किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को पद छोड़ना पड़ा इसके बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और तकनीक आधारित नई परीक्षा व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वह छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है
राजनीतिक दृष्टि से यह घटनाक्रम विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का बड़ा मुद्दा बना जबकि भाजपा ने इसे व्यक्तिगत जवाबदेही और संगठनात्मक अनुशासन का उदाहरण बताया दूसरी ओर छात्र आंदोलनों ने इसे अपनी बड़ी जीत माना और इसे भविष्य में शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने वाले ऐतिहासिक मोड़ के रूप में प्रस्तुत किया।
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