भोपाल, मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा तीसरे राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन दाखिल किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने भाजपा के इस कदम को लोकतंत्र के लिए चुनौती बताते हुए दावा किया है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी की उम्मीदवार मिनाक्षी नटराजन को राज्यसभा भेजकर भाजपा को करारा जवाब दिया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के पास तीसरी सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं है इसके बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारना इस बात का संकेत है कि वह विपक्षी विधायकों में सेंध लगाने या क्रॉस वोटिंग की उम्मीद कर रही है वहीं भाजपा का दावा है कि उसने पूरी राजनीतिक रणनीति और गणित को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है फिर भी क्या कहता है विधानसभा का गणित मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है चुनावी गणित के अनुसार एक उम्मीदवार को जीत के लिए  लगभग 58 वोटों की आवश्यकता होती है वर्तमान में भाजपा के पास 164 विधायक हैं जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगियों के पास करीब 66 विधायक हैं इस हिसाब से भाजपा दो उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती है लेकिन तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे लगभग 8 से 10 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के तीसरे उम्मीदवार को एक रणनीतिक दांव मान रहे हैं एसा संभव नहीं हो सकता फिर भी भाजपा तीसरा उम्मीदवार क्यों उतार रही है राजनीतिक जानकारों के अनुसार भाजपा के इस कदम के पीछे कई कारण हो सकते हैं भाजपा यह देखना चाहती है कि कांग्रेस अपने सभी विधायकों को एकजुट रख पाती है या नहीं यदि कांग्रेस के कुछ विधायक अनुपस्थित रहते हैं या क्रॉस वोटिंग करते हैं तो चुनाव का परिणाम बदल सकता है ऐसा माना जा रहा हैँ क्रॉस वोटिंग की संभावना कों नाकारा नहीं जा सकता हैँ 
राज्यसभा चुनाव में कई बार दलों के विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान कर चुके हैं। भाजपा को उम्मीद हो सकती है कि उसे विपक्षी खेमे से कुछ अतिरिक्त वोट मिल जाएं वहीं 
 राजनीतिक दबाव बनाना भी हो सकता हैँ तीसरा उम्मीदवार उतारकर भाजपा कांग्रेस पर दबाव बनाने की कोशिश भी कर सकती है। इससे कांग्रेस को अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ेंगे वहीं भाजपा को भरोसा हो सकता है कि कुछ निर्दलीय विधायक या छोटे दल उसके पक्ष में मतदान कर सकते हैं जिससे उसके उम्मीदवार की स्थिति मजबूत हो सकती हैँ कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। कांग्रेस का दावा है कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं और किसी प्रकार की टूट-फूट की संभावना नहीं है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा जानती है कि उसके पास तीसरी सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है इसलिए वह राजनीतिक प्रबंधन के जरिए चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश कर रही है पार्टी ने विश्वास जताया है कि मीनाक्षी नटराजन को आवश्यक समर्थन मिलेगा और वे राज्यसभा पहुंचेंगी। राजनीतिक दृष्टि से यह पूरी तरह असंभव नहीं है लेकिन इसके लिए भाजपा को अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। यदि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट रहते हैं और कोई क्रॉस वोटिंग नहीं होती तो कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की संभावना अधिक मानी जा रही है।
हालांकि यदि मतदान के दौरान कुछ विधायक अनुपस्थित रहते हैं मतदान अमान्य हो जाता है या क्रॉस वोटिंग होती है, तो भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की राह आसान हो सकती है। इसी संभावना के कारण भाजपा ने चुनावी मैदान में तीसरा उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। राज्यसभा चुनाव के नतीजे केवल सीटों का फैसला नहीं करेंगे बल्कि यह भी बताएंगे कि मध्य प्रदेश में किस दल का संगठन अपने विधायकों को कितना एकजुट रख पाने में सफल रहा भाजपा का तीसरा उम्मीदवार फिलहाल राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है और अब सभी की निगाहें मतदान और मतगणना पर टिकी हैं।