गोवा एयरपोर्ट पर टल गया बड़ा विमान हादसा
171 यात्रियों की जान आई थी खतरे में; एअर इंडिया एक्सप्रेस के क्रू की लापरवाही उजागर
गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर 3 अप्रैल को एअर इंडिया एक्सप्रेस के यात्री विमान और भारतीय नौसेना के लड़ाकू विमान के बीच टक्कर की गंभीर स्थिति बन गई थी। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की अंतिम जांच रिपोर्ट में इस घटना के लिए एअर इंडिया एक्सप्रेस के पायलटों की लापरवाही और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ गलत संचार को प्रमुख कारण बताया गया है। घटना के समय दिल्ली जाने वाली उड़ान एएक्सबी 1109 में चालक दल सहित कुल 171 लोग सवार थे। दोनों विमानों के रनवे पर एक साथ मौजूद होने से बड़ा हादसा होने की आशंका पैदा हो गई थी। हालांकि, समय रहते स्थिति नियंत्रित कर ली गई और किसी को चोट नहीं आई। एएआईबी की 35 पन्नों की रिपोर्ट में सुरक्षा संबंधी कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है।
जांच के अनुसार, एअर इंडिया एक्सप्रेस के बोइंग 737-8 विमान के क्रू को एयरपोर्ट के सरफेस मूवमेंट कंट्रोल (एसएमसी) नियंत्रक ने निर्धारित स्थान पर रुकने और इसके बाद नौसेना के एप्रोच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से 119.7 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी पर संपर्क करने का निर्देश दिया था। लेकिन पायलटों ने इस प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया। रिपोर्ट में बताया गया कि विमान को रनवे पर प्रवेश करने से पहले नौसेना के एटीसी से संपर्क कर स्पष्ट अनुमति लेना जरूरी था। इसके बजाय पायलट ने नियंत्रक के 'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' निर्देश को रनवे पर प्रवेश की अनुमति समझ लिया। जबकि इस निर्देश का आशय विमान को रनवे पर आगे-पीछे चलने की संभावित प्रक्रिया के लिए तैयार रहने से था। गलतफहमी के बावजूद पायलट ने दोबारा संपर्क कर निर्देश की पुष्टि नहीं की।
रिपोर्ट में दूसरे पायलट यानी पायलट मॉनिटरिंग की भूमिका में भी गंभीर चूक सामने आई है। वह प्रशिक्षु होने के कारण निर्देशों के लिए अपने प्रशिक्षक पर निर्भर था। विमान के निर्धारित स्थान के करीब पहुंचने पर वह टेकऑफ से जुड़े आंकड़ों की जांच में व्यस्त हो गया, जिससे उसका ध्यान एटीसी के रेडियो संदेशों से हट गया। वह न तो निर्देशों की प्रभावी निगरानी कर सका और न ही मुख्य पायलट को बिना अनुमति रनवे पर प्रवेश करने से रोकने के लिए सतर्क किया। एएआईबी ने इसे भी घटना का सहायक कारण माना है। जांच एजेंसी के मुताबिक, यदि नियंत्रक पायलट से निर्देश दोहराने को कहता और गलतफहमी को तत्काल दूर करता, तो स्थिति टाली जा सकती थी। रिपोर्ट में पायलटों और एटीसी के बीच बेहतर संवाद तथा आपसी तालमेल की जरूरत पर जोर दिया गया है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एएआईबी ने एअर इंडिया एक्सप्रेस को सभी क्रू सदस्यों के लिए सुरक्षा संबंधी सर्कुलर जारी करने की सिफारिश की है। साथ ही उड़ान एएक्सबी 1109 के चालक दल की काउंसलिंग और मुख्य पायलट को विशेष सुरक्षा प्रशिक्षण देने की सलाह दी गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को रेडियो संचार में मानक शब्दावली अपनाने और पायलटों के जवाबों की सावधानीपूर्वक पुष्टि करने के निर्देश देने को कहा गया है। विशेष रूप से 'एक्सपेक्ट बैकट्रैक' जैसे शब्दों के इस्तेमाल की समीक्षा करने की जरूरत बताई गई है, ताकि उन्हें रनवे पर प्रवेश की अनुमति समझने जैसी गलतफहमी न हो।
जांच रिपोर्ट में डाबोलिम एयरपोर्ट के टैक्सीवे एन2 को संभावित जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित करने पर भी विचार करने को कहा गया है। यह टैक्सीवे सिविल एप्रन के बे नंबर एक और दो के नजदीक स्थित है, जहां विमानों के बीच टक्कर और रनवे पर अनधिकृत प्रवेश का खतरा हो सकता है। इसके अलावा डीजीसीए, एएआईबी और रक्षा अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की सिफारिश की गई है। नौसेना के आईएनएस हंसा को भी ग्राउंड कंट्रोल और टावर के बीच संचार हस्तांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा गया है। घटना के बाद नौसेना और एएआई अधिकारियों की बैठक में व्यवस्था में बदलाव किया गया। अब दिन की ड्यूटी संभालते समय एसएमसी नियंत्रक हॉटलाइन के माध्यम से नौसेना के एटीसी से रनवे और फ्रीक्वेंसी में बदलाव जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों की पुष्टि करेगा।
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