CURATED BY - ABHISHEK TIWARI | CITYCHIEFNEWS

रीवा, आज लंबे अंतराल के बाद रीवा कांग्रेस पर लिखने की जरूरत महसूस किया तो लगा कि कांग्रेस पार्टी जिताऊ उम्मीदवार के चक्कर में अपने मूल कार्यकर्ताओं को निरंतर अपमानित कर रही है।बात कर रहा हूं 2018 के चुनाव की जिसका अप्रत्याशित परिणाम पार्टी को चौकाने वाले रहे जिसका प्रमुख कारण रहा कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने पार्टी कार्यकर्ताओं पर भरोसा न करते हुए अन्य दलों से आए हुए लोगों पर भरोसा जताया।पार्टी जिले की आठ सीटों में से चार सीटों पर क्रमशः रीवा से बीजेपी से आए अभय मिश्र,त्यौंथर से जनता दल से आए रमाशंकर सिंह पटेल, मनगवां से बीएसपी से आई बबिता साकेत एवम देवतालाब में भी बीएसपी से आई विद्यावती पटेल को अपना प्रत्यासी घोषित किया। अर्थात 50% सीटों पर पार्टी अपने मूल कार्यकर्ताओं पर भरोसा न करते हुए अन्य दलों से हार कर आए लोगों पर भरोसा जताया पार्टी कार्यकर्ताओं के ऊपर विश्वास न करने का परिणाम पार्टी के लिए घातक सिद्ध हुआ और पार्टी जिले की आठों सीट हार गई।पार्टी पिछले चुनाव से सीख न लेते हुए  2023 के चुनाव में एक कदम और आगे निकलते हुए क्रमशः गुढ़ से समाजवादी पार्टी से आए कपिध्वज सिंह को, त्यौंथर से पुनः जनता दल से आए रमाशंकर सिंह पटेल को, सिरमौर से बीएसपी से आए रामगरीब वनवासी को, देवतालाब से बीजेपी से आए पद्मेश गौतम को, मनगवां से बीएसपी से आई बबिता साकेत को और हद तो तब हो गई जब बीजेपी कांग्रेस बीजेपी कांग्रेस का लुकाछिपी का खेल खेलने वाले आयाराम गयाराम अभय मिश्र को सेमरिया से पार्टी ने अपना प्रत्यासी घोषित किया।
यहां पर उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा अन्य दलों से आए हुए लोगों को प्रत्यासी बनाया जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि या तो जिले में पार्टी का संगठन मात्र कागजों पर है धरातल पर नहीं अथवा पार्टी प्रमुखों को जिले भर के पार्टी कार्यकर्ताओं के ऊपर विश्वास नहीं है।