नई दिल्ली। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय बॉक्सिंग, जूडो और पैरा एथलेटिक्स खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों को केवल पदक जीतने तक सीमित न रहने, बल्कि खेल जीवन के बाद देश में नई प्रतिभाओं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अनुभवी खिलाड़ियों को भविष्य में अपनी खेल अकादमियां स्थापित कर युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करना चाहिए।

सम्मान समारोह में स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 20 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को 10 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

बॉक्सिंग में भारत का दबदबा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सिंग टीम ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 7 स्वर्ण और 3 रजत सहित कुल 10 पदक अपने नाम किए। इस उपलब्धि के साथ भारत ने बॉक्सिंग की पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। विशेष बात यह रही कि महिला मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण पदक जीतकर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

स्वर्ण पदक जीतने वालों में प्रीति पवार (54 किग्रा), जैसमीन लम्बोरिया (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घांघस (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) शामिल रहे। वहीं जादुमणि सिंह (55 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (90+ किग्रा) ने रजत पदक हासिल किए।

जूडो में भी पहली बार बना इतिहास

भारतीय जूडो दल ने भी इस संस्करण में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य सहित कुल चार पदक जीते। खेलो इंडिया से जुड़े खिलाड़ी अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने भारत को जूडो में पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण दिलाकर नया इतिहास रचा। अस्मिता डे कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडोका बनीं, जबकि हर्ष सिंह यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बने।

पैरा खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भी सराहा

समारोह में पैरा एथलेटिक्स टीम के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। ग्लासगो में भारतीय पैरा एथलीटों के प्रदर्शन को देश के पैरा खेलों के लिए मील का पत्थर बताते हुए खेल मंत्री ने उनकी उपलब्धियों की सराहना की।

खेल अकादमी खोलने का दिया संदेश

डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों से कहा कि उनका उद्देश्य केवल पदक जीतकर सरकारी नौकरी प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल से संन्यास लेने के बाद खिलाड़ियों को अपनी विशेषज्ञता का लाभ देश को देना चाहिए और खेल अकादमियों के माध्यम से नई प्रतिभाओं को तैयार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने संशोधित खेलो इंडिया योजना के लिए 36 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे देश में खेल ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।

एशियाई खेलों के लिए बढ़ाया उत्साह

खेल मंत्री ने खिलाड़ियों से कॉमनवेल्थ गेम्स की सफलता को एशियाई खेल 2026 में दोहराने का आह्वान किया। उन्होंने रजत और कांस्य पदक विजेताओं को अगली बार स्वर्ण जीतने का लक्ष्य निर्धारित करने तथा स्वर्ण पदक विजेताओं को अपनी निरंतरता बनाए रखने की सलाह दी।

गुरु के योगदान को न भूलने की नसीहत

अपने संबोधन में डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों को अपने कोच और गुरुओं के योगदान का सम्मान करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि एक अच्छे गुरु का मार्गदर्शन खिलाड़ी के पूरे जीवन को दिशा देता है और सफलता की मजबूत नींव तैयार करता है।

सरकारी योजनाओं से मिली सफलता

खेल मंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला। इनमें खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन (ACTC), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों में प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, आधुनिक उपकरण और उच्च स्तरीय कोचिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन योजनाओं ने खिलाड़ियों की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।