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शाजापुर। अंचल में सर्द हवाओं के बढ़ते जोर से जहां लोग बेचैन हो उठे हैं तो फसलों पर पाला पडऩे की चिंता ने किसानों को घेर लिया है। वहीं मौसम विभाग मौसम के और भी सर्द होने की बात कह रहा है। इस वर्ष दिसंबर माह की शुरूआत से ही सर्द हवाओं ने अंचल को अपनी आगोश में समेट लिया था लेकिन अब सर्द हवाएं सितम ढाने लगी हैं। यही कारण है कि रात के अलावा दिन भी ठिठुरन भरे साबित हो रहे हैं। निरंतर बढ़ती ठंड की वजह से गुरुवार की रात बेहद सर्द रात के रूप में दर्ज हुई और ठंडी हवाओं के चलते शुक्रवार सुबह खेतों में बर्फ की चादर बिछी दिखाई दी। मौसम विशेषज्ञ सत्येंद्र धनोतिया ने बताया कि तेज रफ्तार से चल रही सर्द हवाओं के कारण न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि अधिकतम तापमान 26.6 डिग्री रहा। फिलहाल तापमान में गिरावट बनी रहेगी।
सर्द हवाओं से कपकपाया अंचल
उल्लेखनीय है कि दिसंबर माह के दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सर्द हवाओं का जोर भी बढ़ता जा रहा है। ठंड से बचने के लिए सूरज ढलते ही चौक-चौराहों पर अलाव रोशन हो रहे हैं और घरों से बाहर निकले लोग अलाव तापते नजर आ रहे हैं। मौसम के जानकार धनोतिया का कहना है कि उत्तर-पश्चिमी सर्द हवाओं की सरसराहट आने वाले दिनों में भी सितम ढाती रहेगी और रात के तापमान में गिरावट बनी रह सकती है। यदि मौसम विभाग की यह भविष्यवाणी सही साबित होती है तो आगामी दिनों में पाला पडऩे से रबी की फसल में भारी नुकसान हो सकता है। खासकर आलू की फसल अधिक प्रभावित हो सकती है।
किसानों को पाले से बचाव की सलाह
जिले में रबी फसलों की वर्तमान स्थिति अच्छी है, लेकिन विगत 2 से 3 दिनों में लगातार गिरता हुआ तापक्रम एवं बढ़ती ठंड फसलों को नुकसान पहुचा सकती है। आगामी दिनों में पाले की सम्भावना है और रात का तापक्रम 5 डिग्री सेंटीग्रेट से कम हो सकता है। ऐसे में इस विषम परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ जीआर अंबावतिया द्वारा पाले एवं ठंड से फसलों को बचाने के लिए किसानों को उचित सलाह तथा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि जब तापक्रम लगातार 5 डिग्री सेंटीग्रेट से कम हो जाता है तो फसलों के अंदर उपस्थित पानी जम जाता है जिससे कोषिकाभित्त फट जाती है और तरल पदार्थ बाहर की तरफ आ जाते हैं। पौधे मुरझा जाते हैं इसे ही पाला या ठंड से जलना कहते हैं। पाले से पौधा-बीज खराब होकर मर जाता है और कृषकों का नुकसान होता है। इसके लिए पहले से सचेत रहना चाहिए। विशेष रूप से आलू, मटर, सरसो, काबुली चना एवं अन्य सब्जीवर्गीय फसल को बचाने हेतु उपाय करना चाहिए। उन्होने किसानों से कहा है कि पाला पडऩे की स्थिति में सिंचाई करने से खेत का तापक्रम 0.5 डिग्री से 2 डिग्री तक बढ़ जाता है। पाले की सम्भावनाओं को देख खेत में हल्की सिंचाई स्प्रीकंलर से करें, जिससे मिट्टी गीली रहे। बहुत अधिक या कम पानी ना दें। कुछ रसायनों के उपयोग से भी पाले से बचाव किया जा सकता है। थायोयूरिया की 500 ग्राम मात्रा का एक हजार लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। 8 से 10 किलोग्राम सल्फर डस्ट प्रति एकड़ बुरकाव अथवा वेटेबल या घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करना भी पाले के विरूध कारगर उपाय पाया गया है। इसीके साथ खेतों, बगीचों में धुआं के लिए नम घांस या टहनियों को इस तरह जलाएं कि धुआं खेतों पर एक परत बना लें तथा खेत में फसलों, पौधों के उपर धुआ बना रहें इससे तापक्रम में 5 डिग्री अंतर आ जाता है। 6 से 8 जगहों पर धुआ करें। जला हुआ इंजन आयल या टायर जलाए तो ज्यादा धुआ हो जाएगा, यह प्रकिया आधी रात्रि के बाद करने से ज्यादा कारगर होता है।