सिटी चीफ स्पेशल रिपोर्ट: इतिहास के झरोखे से ...
जानिए कौन है दमोह के पहले विधायक श्री हरिश्चंद्र मरोठी
CURATED BY –DHEERAJ KUMAR AHIRWAL | CITYCHIEFNEWS
दमोह, अब जब विधानसभा आम चुनाव 2023 के लिए प्रक्रिया शुरु हो गयी है। पत्रकार के नाते चुनावी इतिहास भी स्मृति में आ रहा है। आजादी के बाद पहले आम चुनाव 1952 में हुए थे। दमोह सीट से पहले विधायक थे श्री हरिश्चंद्र मरोठी। वे अपने जमाने के नामी वकील और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।
हरिश्चन्द्र मरोठी का जन्म 1915 में दमोह में हुआ था। उनके पिता श्री लक्ष्मीचंद्र मरोठी बड़े कारोबारी और धनाड्य व्यक्ति थे। हरिश्चंद्र जी की स्कूली शिक्षा दमोह में हुई थी। वे जबलपुर से बी. ए. और एल. एल. बी. करने के बाद दमोह कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। वे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए ।उन्होंने तीन माह की जेल की सजा अमरावती जेल में काटी थी। आजादी के बाद जब 1952 में पहले आम चुनाव हुए तो कांग्रेस ने उन्हें दमोह सीट से उम्मीदवार बनाया। वे चुनाव जीतकर सी. पी. एंड बरार प्रदेश की विधानसभा के सदस्य बने। तब हमारे प्रदेश की राजधानी नागपुर थी। 1956 में नया मध्यप्रदेश बना। 1957 में विधानसभा चुनाव में वह दोबारा दमोह से चुने गए। 1962 में मरोठी जी को कांग्रेस ने लगातार तीसरी बार टिकट दी। इस बार खुद कांग्रेस पार्टी में मरोठी जी के खिलाफ असंतोष था । कांग्रेस नेता श्री चंद्रनारायण टंडन विद्रोह कर निर्दलीय चुनाव लड़े ।जनसंघ से श्री सीताराम शेंडेय उम्मीदवार थे । पर जबलपुर से पत्रकारिता की नौकरी छोड़ आनंद कुमार श्रीवास्तव दमोह आये और विधानसभा का चुनाव लड़े। आनंद भैया खुद ओजस्वी वक्ता थे और उनके स्वर्गीय पिता श्री द्वारका प्रसाद श्रीवास्तव की राजनीतिक विरासत भी उनके पास थी। द्वारका प्रसाद जी लंबे समय तक दमोह नगरपालिका के लोकप्रिय अध्यक्ष रहे थे अंततः आनंद श्रीवास्तव ने निर्दलीय जीत का इतिहास बनाया।
इस हार के बाद मरोठी जी के राजनीतिक जीवन पर विराम लग गया । 19अक्तूबर 1975 को श्री हरिश्चंद्र मरोठी का निधन हो गया था । हमारे क्षेत्र के प्रथम विधायक श्री मरोठी जी का पुण्य स्मरण। सादर नमन।
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