CURATED BY – GANESH VAISHNAV | CITYCHIEFNEWS

(छत्तीसगढ़) नारायणपुर, 19 अक्टूबर 2024/ बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर बस्तर मड़ाई सरस सांस्कृतिक कार्यक्रम जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित की गई थी जिसमें बस्तर अंचल के विभिन्न जिलों से अलग -अलग तिथि में धुरवा नृत्य, गौर नृत्य, काकसर नृत्य और माटी मांदरी नृत्य आदि अलग अलग मनहोहक प्रस्तुतिया प्रस्तुत की।  नारायणपुर जिले के कलेक्टर श्री बिपिन मांझी, मुख्यकार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री वासु जैन, अपर कलेक्टर श्री बीरेंद्र बहादुर पंचभाई एवं श्री बद्रीश सुखदेवे सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग के सहयोग एवं मार्गदर्शन से ग्राम नयानार  के कलाकारों ने ककसाड़ नृत्य की प्रस्तुति जगदलपुर के लालबाग मैदान में 18 अक्टूबर को अपनी प्रस्तुति दी.
ककसड़ या ककसार नृत्य छत्तीसगढ के नारायणपुर जिले की मुड़िया और अबूझमाड़िया जनजाति के युवक युवतियों द्वारा किया जाने वाला एक लोक नृत्य हैं। यह नृत्य फसल और वर्षा के देवता ककसाड की पूजा के उपरांत किया जाता हैं। इस नृत्य के साथ संगीत और घुंघरूओ की मधुर ध्वनि से एक रोमांचक वातावरण उत्पन्न होता है।
ककसड़ नृत्य मूलतः जतरा नृत्य हैं, इसलिए इसे जतरा नृत्य भी कहते हैं। गांव के धार्मिक स्थल पर मुड़िया और अबूझमाड़िया जनजाति के लोग वर्ष में एक बार ककसड़ जतरा पर पूजा का आयोजन करते हैं। इसमें युवक युवतिया अपनी साज सज्जा करके सम्पूर्ण रात नृत्य गायन करते हैं। पुरूष कमर में घंटी बांधते हैं जबकि युवतियां सिर पर विभिन्न फूलों और मोतियों की मालाएं पहनती हैं।
ककसड़ नृत्य एक मुड़िया और अबूझमाड़िया जनजाति का धार्मिक नृत्य हैं जिसे करते समय नर्तक युवा अपने कमर में पीतल या लोहे की घंटियां हिरनाग बांधे रहते हैं, जिससे मधुर ध्वनि उत्पन्न होते रहती हैं, इसके अलावा युवा  अपने सिर पर पगड़ी कलगी (जलिंग) और कौड़ीयों से श्रृंगार कर आकर्षक वेशभूषा से लोगों को और भी आकर्षक बनाते हैं। मांदरी की ताल से नृत्य प्रारंभ होती हैं, मांदरी की ताल के साथ युवतियां भी चिटकुल बजाते हुए मांदरी की ताल के साथ संगत मय नृत्य करते हैं। मुड़िया अबूझमाड़िया जनजाति के ककसड़ नृत्य, मांदरी नृत्य, गेड़ी नृत्य अपनी गीतात्मक और भी सुंदर होते जाता हैं।
ककसाड़ नृत्य के मुख्य कलाकार जैनू सलाम बताते है की ककसड़ नृत्य की प्रस्तुति   देश के विभिन्न राज्यों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। इन कलाकारों के साथ आदिवासी विकास विभाग के शाखा प्रभारी श्री एस. एस. कांगे भी उपस्थित थे।