Curated by – NARESH VISHWAKRAMA | CITYCHIEFNEWS

पन्ना, भाई आज जनपद सभागार पवई में आदि शंकराचार्य जी की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई गई जिसमें मुख्य अतिथि उमा कुमार पांडे शास्त्री जी और जनप्रतिनिधि पुष्पेंद्र पटेल जनभागीदारी अध्यक्ष  पीसीओ वेदनारायण अवस्थी जी ब्लॉक समन्वयक जागेश्वर ताम्रकार जी, विनोद गुप्ता , प्रतीक ताम्रकार मंच का संचालन आशीष नामदेव जी ने किया और आदि शंकराचार्य जी के बारे में जीवन के बारे में बताया गया जिसमें नमाकुर समितियां और प्रस्फुटन  समितियों के सभी अध्यक्ष सचिव और सदस्य मौजूद रहे आदिशंकराचार्य जी साक्षात् भगवान का रूप थे. आप केरल के साधारण ब्राह्मण परिवार मे 778 ई. में केरल एक छोटे से गांव  कलादी में  जन्मे थे  शंकराचार्य जी के जन्म की एक छोटी सी कथा है जिसके अनुसार शंकराचार्य के माता-पिता बहुत समय तक निसंतान थे कड़ी तपस्या के बाद माता-पिता आरंबा को सपने में भगवान शिव ने दर्शन दिए और कहा कि उनके पहले पुत्र के रूप में वह स्वयं अवतरित होंगे परंतु उनकी आयु बहुत ही कम होगी शंकराचार्य जी स्वभाव में शांत और गंभीर थे कुछ भी सुनते थे या पढ़ते थे एक बार में समझ लेते थे अपने मस्तिष्क में बिठा लेते थे शंकराचार्य सभी वेदों और लगभग 6 से अधिक वेदांता में महारत हासिल कर ली थी आपकी जन्म से आध्यात्मिक क्षेत्र मे रूचि रही है जिसके चलते, सांसारिक जीवन से कोई मोह नही था . आपको गीता,उपन्यास, उपनिषद् , वेदों और शास्त्रों का स्वज्ञान प्राप्त था, जिसे आपने पूरे विश्व मे फैला है।