सहारनपुर सीट पर भाजपा का जिताऊ उम्मीदवार को लेकर मंथन
सुरेश राणा, स्वामी दीपांकर महाराज और राघव लखनपाल शर्मा दौड़ में शामिल
CURATED BY – GAURAV SINGHAL | CITYCHIEFNEWS
सहारनपुर, पहले नंबर की सहारनपुर लोकसभा सीट पर भाजपा एक-दो दिन में ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा और स्वामी दीपांकर महाराज के नाम को लेकर भाजपा आलाकमान मंथन कर रहा है। पार्टी नेतृत्व यहां इस बार जिताऊ उम्मीदवार का चयन करना चाहता है। 39 फीसद मुस्लिम और 20 फीसद दलित बहुलता की इस सीट पर इस बार 18 लाख 50 हजार 85 मतदाता हैं। जिनमें 9 लाख 77 हजार 567 पुरूष, 8 लाख 72 हजार 429 महिलाएं और 89 थर्ड जेंडर हैं। पिछले चुनाव में सपा समर्थित बसपा के फजर्लुरहमान कुरैशी ने 5 लाख 14 हजार 139 यानि 41.89 फीसद वोट लिए थे। भाजपा के पराजित उम्मीदवार राघव लखनपाल शर्मा को 4 लाख 91 हजार 722 वोट यानि 40.06 फीसद वोट मिले थे। कांग्रेस के इमरान मसूद ने 2 लाख 7 हजार 68 वोट लिए थे जो 16.87 फीसद थे।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा जीती थी। उसके उम्मीदवार राघव लखनपाल शर्मा ने 4 लाख 72 हजार 999 वोट लिए थे। कांग्रेस के इमरान मसूद ने 4 लाख 7 हजार 909 वोट लिए थे। बसपा के जगदीश राणा को 2 लाख 35 हजार 33 वोट मिले थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 16 लाख 8 हजार 823 वोट थे। सहारनपुर लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा आती हैं। बेहट और सहारनपुर देहात पर सपा का कब्जा है। जबकि देवबंद, रामपुर मनिहारान और सहारनपुर शहर पर भाजपा के विधायक हैं।
इस बार उत्तर प्रदेश में मोदी राम लहर पर सवार हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता और साख भी भाजपा के लिए जिताऊ फैक्टर है। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यहां के सबसे लोकप्रिय और दमदार नेता इमरान मसूद को उम्मीदवार घोषित किया है। इमरान मसूद के सगे चाचा काजी रसीद मसूद 1977, 1980, 1989, 1991, 2004 में यहां से लोकसभा सांसद रहे हैं। यानि वह सबसे ज्यादा पांच बार सांसद रहे हैं। 1952 के पहले चुनाव में पंड़ित जवाहर लाल नेहरू के करीबी अजीत प्रसाद जैन सांसद चुने गए थे। 1957, 1962, 1967 और 1971 में चार दलित नेता सुंदर लाल कांग्रेस से सांसद रहे। 1984 में चौधरी यशपाल सिंह कांग्रेस से चुनाव जीते। उसके बाद कभी भी कांग्रेस यहां चुनाव नहीं जीत पाई। भाजपा के चौधरी नकली सिंह ने पहली बार 1996 में यह सीट भाजपा को दिलाई थी। 1998 में भी उन्होंने जीत दर्ज की थी। बसपा में 1999 के चुनाव में पहली बार यहां खाता खोला। मंसूर अली खान सांसद चुने गए। 2009 में फिर बसपा जीती। अबकी चुने गए सांसद जगदीश राणा थे। जो राजपूत बिरादरी से थे। जगदीश राणा राजपूत के रूप में इस सीट से जीतने वाले इकलौते सांसद रहे हैं। भाजपा ने फिर 2014 में यह सीट अपने कब्जे में की और राघव लखनपाल शर्मा जीतकर लोकसभा पहुंचे। यानि भाजपा अभी तक इस सीट पर तीन बार ही जीत दर्ज कर पाई है। इस सीट पर भाजपा के पक्ष में जो महत्वपूर्ण बात है वह है यहां 25 फीसद सवर्ण जाति के मतदाताओं की मौजूदगी है। सहारनपुर सीट पर गुर्जर राजपूत, सैनी मतदाता यदि सवर्णों के साथ मिलकर एकजुट मतदान करते हैं तो भाजपा का उम्मीदवार मुस्लिम बहुल सीट होने के बावजूद जीत दर्ज कर सकता है। भाजपा यहां तभी जीत पाएगी जब उसका उम्मीदवार हिंदू मतदाताओं का ध्रुर्वीकरण करने में सफल होता है और इसी बिंदु पर भाजपा अपने उम्मीदवार का चयन करना चाहेगी। इमरान मसूद के मैदान में आने से ध्रुर्वीकरण तय है। हालांकि बहुजन समाज पार्टी जिला पंचायत सदस्य और मुस्लिम गाडा बिरादारी के माजिद अली को मैदान में उतार रही है। वह भाजपा के लिए कितना राहतभरा हो सकता है यह चुनाव नतीजे से ही पता चल पाएगा।