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शाजापुर, परमात्मा लक्ष्मी के स्वामी हैं और लक्ष्मी जीव मात्र की माता हैं। यह विचार नित्यानंद आश्रम में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय भागवत कथा के दौरान बुधवार को श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह प्रसंग पर कथा वाचक पंडित देवकरण शर्मा ने व्यक्त किए। उन्होने कहा कि संपत्ति, शक्ति और समय का सदुपयोग करें, क्योंकि सदुपयोग करने वाला देव बनता है। उन्होने कहा कि लक्ष्मी नारायण को ही प्राप्त होती है, शिशुपाल को नहीं। जो हमेशा सांसारिक और भौतिक सुखों के पीछे भागता है वही शिशुपाल है। इस दौरान दो बालिकाओं को श्रीकृष्ण-रुक्मणी के वेश में सजाया गया और मंत्रोच्चार, मंगलाष्टक के गान के साथ विवाह संपन्न कराया गया।