आज थमेगी अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा
मशहद में होगा सुपुर्द-ए-खाक
तेहरान/मशहद, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की बहुचर्चित अंतिम यात्रा गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच रही है। तेहरान, कुम, नजफ और कर्बला से गुजरने के बाद आज उनके पार्थिव शरीर को उनके जन्मस्थान मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से इस समारोह को ईरान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खामेनेई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह के निकट दफनाया जाएगा, जो शिया मुस्लिम समुदाय के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। उनकी मृत्यु फरवरी 2026 में अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों के दौरान हुई थी। इसके बाद उनके पुत्र अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुना गया। सुरक्षा और युद्ध की परिस्थितियों के चलते अंतिम संस्कार कई महीनों बाद आयोजित किया गया।
छह दिन तक चला अंतिम यात्रा का कार्यक्रम
रिपोर्टों के अनुसार अंतिम यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई को तेहरान से हुई, जहां लाखों लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद विभिन्न शहरों में अंतिम यात्रा निकाली गई। 7 जुलाई को कुम में विशेष श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ, जबकि 8 जुलाई को इराक के पवित्र शहर नजफ और कर्बला में भी धार्मिक आयोजन किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में शिया श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
आज मशहद में अंतिम संस्कार के साथ यह छह दिवसीय कार्यक्रम संपन्न होगा। ईरानी प्रशासन ने पूरे आयोजन के दौरान अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। कई मार्गों पर यातायात नियंत्रित किया गया और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई।
अंतिम संस्कार के साथ राजनीतिक संदेश भी
करीब चार दशक तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे खामेनेई का राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव देश की व्यवस्था पर गहराई से रहा। उनके अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के साथ अमेरिका विरोधी नारे भी सुनाई दिए, जिसे ईरानी नेतृत्व राष्ट्रीय एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन नए नेतृत्व के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश का माध्यम बनेगा।
ईरान के इतिहास में दर्ज होगा यह दिन
खामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ईरान के राजनीतिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के समापन के रूप में भी देखा जा रहा है। मशहद जैसे पवित्र शहर में उनका दफन देश की धार्मिक और राजनीतिक विरासत से जुड़ा एक प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। अंतिम संस्कार के साथ ईरान एक नए नेतृत्व और नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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