नई दिल्ली, वैदिक पंचांग के अनुसार 25 जून 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आज ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिस पर वर्ष की सबसे कठिन और पुण्यदायी मानी जाने वाली निर्जला एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इसी दिन गायत्री जयंती का पर्व भी मनाया जा रहा है।

विशेष बात यह है कि आज रवि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। हालांकि, दिन के अधिकांश समय भद्रा का प्रभाव भी रहेगा। ऐसे में पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य या किसी नए कार्य की शुरुआत से पहले शुभ मुहूर्त और राहुकाल की जानकारी लेना आवश्यक है। आइए जानते हैं, आज का संपूर्ण पंचांग।

आज का पंचांग (25 जून 2026)

    तिथि

  एकादशी तिथि रात्रि 8 बजकर 09 मिनट तक रहेगी।

   सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति

  सूर्योदय: प्रातः 5:25 बजे
  सूर्यास्त: सायं 7:23 बजे
  चंद्रोदय: दोपहर 3:38 बजे
  चंद्रास्त: 26 जून को रात्रि 2:10 बजे

   नक्षत्र और योग

  स्वाती नक्षत्र: सायं 4:29 बजे तक
  शिव योग: प्रातः 10:54 बजे तक
  रवि योग: प्रातः 5:25 बजे से सायं 4:29 बजे तक

   आज के करण

  वणिज करण: प्रातः 7:08 बजे तक
  विष्टि (भद्रा) करण: रात्रि 8:09 बजे तक

   पक्ष और वार

  पक्ष: शुक्ल पक्ष
  वार: गुरुवार

   हिन्दू पंचांग संवत्सर

  शक संवत: 1948, विश्वावसु
  विक्रम संवत: 2083, कालयुक्त
  गुजराती संवत: 2082, पिंगल
  चंद्रमास (पूर्णिमांत): ज्येष्ठ
  चंद्रमास (अमांत): ज्येष्ठ

   आज के शुभ मुहूर्त

धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए आज निम्नलिखित शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे—

  अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:56 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक
  विजय मुहूर्त: दोपहर 2:43 बजे से 3:39 बजे तक
  ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:05 बजे से 4:45 बजे तक
  निशीथ मुहूर्त: 26 जून को रात्रि 12:04 बजे से 12:44 बजे तक
  गोधूलि मुहूर्त: सायं 7:21 बजे से 7:42 बजे तक
  अमृत काल: प्रातः 6:46 बजे से 8:32 बजे तक
  रवि योग: प्रातः 5:25 बजे से सायं 4:29 बजे तक

   आज के अशुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निम्न समय में महत्वपूर्ण और शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है—

  दुर्मुहूर्त: प्रातः 10:04 बजे से 11:00 बजे तक तथा दोपहर 3:39 बजे से 4:35 बजे तक
  राहुकाल: दोपहर 2:09 बजे से 3:53 बजे तक
  यमगण्ड काल: प्रातः 5:25 बजे से 7:10 बजे तक
  गुलिक काल: प्रातः 8:54 बजे से 10:39 बजे तक
  भद्रा काल: प्रातः 7:08 बजे से रात्रि 8:09 बजे तक

   धार्मिक महत्व

निर्जला एकादशी को सभी 24 एकादशियों के समान पुण्य देने वाली एकादशी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। वहीं, गायत्री जयंती के अवसर पर श्रद्धालु माता गायत्री की पूजा-अर्चना और मंत्र जाप कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।