महाराष्ट्र में फिर सियासी भूचाल
उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय जो बवाल मचा है वह केवल 6 सांसदों के पाला बदलने का मामला नहीं है, बल्कि 2022 में शिवसेना टूटने से शुरू हुई लड़ाई का नया अध्याय है सबसे पहले यह स्पष्ट कर दें कि ये 6 सांसद सीधे भाजपा में नहीं गए हैं बल्कि उन्होंने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थामा है जो पहले से भाजपा और एनडीए की सहयोगी है पहला अध्याय 2022 की बगावत से शुरू हुआ जून 2022 में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के दर्जनों विधायकों के साथ बगावत कर दी उनका आरोप था कि उद्धव ठकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन कर बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व वाली विचारधारा से समझौता किया है इसके बाद महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई और शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने जब कि दूसरा अध्याय पार्टी और चुनाव चिन्ह की लड़ाई इसके बाद असली शिवसेना कौन है इस पर कानूनी लड़ाई चली चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह दे दिया उद्धव ठाकरे को नया नाम शिवसेना (UBT)और नया चुनाव चिन्ह लेना पड़ा इससे दोनों गुटों के बीच तनाव और बढ़ गया इसके साथ ही तीसरा अध्याय मे 2024-25 के चुनाव लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और 9 सांसद जीतकर संसद पहुंचाए वहीं शिंदे गुट को अपेक्षाकृत कम सफलता मिली इसके बाद उद्धव गुट को लगा कि जनता उनके साथ है लेकिन शिंदे गुट लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटा रहा चौथा अध्यये मे ऑपरेशन टाइगर शुरू हुआ जून 2026 में खबरें आने लगीं कि उद्धव गुट के कई सांसद शिंदे के संपर्क में हैं इस अभियान को शिंदे समर्थकों ने "ऑपरेशन टाइगर" नाम दिया 17 जून को 6 सांसदों ने अलग समूह बनाने की प्रक्रिया शुरू की और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की इसके बाद 22 जून को सभी 6 सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो गए शिंदे ने इसे छक्का बताते हुए कहा कि उनकी शिवसेना का विस्तार हो रहा है कौन-कौन सांसद गए उद्धव गुट से UBT छोड़ने वाले प्रमुख सांसदों में ओमप्रकाश राजेनिम्बालकर,नागेश पाटील अष्टीकर,संजय जाधव संजय दीना पाटील, भाऊसाहेब वाकचरे, संजय देशमुख इन सभी ने उद्धव गुट छोड़कर शिंदे गुट का साथ दिया सांसदों ने जाने की वजह भी बताई रिपोर्टों के अनुसार बागी सांसदों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व उनसे संवाद नहीं कर रहा था चुनाव क्षेत्रों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे संगठन में कुछ नेताओं का दबदबा बढ़ गया था उन्हें लगा कि शिंदे गुट के साथ रहने पर राजनीतिक भविष्य अधिक सुरक्षित रहेगा वहीं उद्धव गुट का आरोप है कि सत्ता और दबाव की राजनीति के जरिए सांसदों को तोड़ा गया भाजपा का नाम बीच में क्यों आ रहा है हालांकि सांसद सीधे भाजपा में नहीं गए हैं लेकिन शिंदे गुट एनडीए का हिस्सा है और भाजपा के साथ सरकार चला रहा है इसलिए विपक्ष का आरोप है कि भाजपा पर्दे के पीछे से विपक्षी दलों को कमजोर कर रही है सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर इसे "ऑपरेशन लोटस" का नया रूप भी कहा जा रहा है हालांकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है महाराष्ट्र में इतना बड़ा बवाल होने पीछे 5 बड़े कारण हैं
1. उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसद चले गए जिससे उनकी संसदीय ताकत बुरी तरह घट गई।
2. 2022 के बाद यह उद्धव ठाकरे के सामने दूसरी बड़ी टूट है।
3. अब विधायकों के टूटने की भी अटकलें लग रही हैं।
4. आगामी स्थानीय निकाय और मुंबई महानगरपालिका चुनावों से पहले शक्ति संतुलन बदल सकता है।
5. यह लड़ाई अब सिर्फ सीटों की नहीं बल्कि बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत पर दावे की बन गई है।
आगे क्या हो सकता हैँ राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शिंदे गुट अब और नेताओं को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकता है वहीं उद्धव ठाकरे संगठन बचाने के लिए आपात बैठकें कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में जुटे हैं आने वाले महीनों में महाराष्ट्र की राजनीति में और बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं संक्षेप में कहा जयें तो यह विवाद केवल 6 सांसदों के जाने का नहीं है बल्कि 2022 में शुरू हुई शिंदे बनाम उद्धव की लड़ाई का सबसे बड़ा संसदीय झटका माना जा रहा है जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से उबाल पर ला दिया है।
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