अंतरराष्ट्रीय डेस्क: इस समय केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (inflation) का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका भी इससे अछूती नहीं है। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी सैन्य संघर्ष और ईंधन की घटती आपूर्ति के कारण अमेरिका में डीजल की कीमतों में अनपेक्षित उछाल आया है, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

फिलहाल अमेरिका में डीजल की औसत कीमत $5.85 प्रति गैलन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। ट्रक, ट्रेन, मालवाहक जहाजों और कृषि उपकरणों का प्राथमिक ईंधन होने के कारण डीजल की इस बढ़ोतरी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा की उपभोग्य वस्तुएं और महंगी होने के आसार हैं।

युद्ध के बाद से कच्चे तेल और डीजल में तेज उछाल
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से ठीक पहले फरवरी के अंत तक अमेरिका में डीजल का औसत मूल्य $3.76 प्रति गैलन था। महज कुछ ही महीनों में इसमें 55% से अधिक का उछाल आया है।

ब्रेंट क्रूड का रुख: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $70 प्रति बैरल के स्तर से उछलकर $95 प्रति बैरल के पार निकल चुका है।

सप्लाई चेन पर असर: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते वैश्विक ईंधन आपूर्ति बाधित हुई है। रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता ने इस संकट को और गहरा दिया है।

किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सीधा असर?
डीजल की बढ़ी हुई दरें केवल परिवहन तक सीमित न रहकर आम उपभोक्ताओं की जेब पर चौतरफा मार डालेंगी। माल ढुलाई (Freight) महंगी होने से निम्नलिखित क्षेत्रों में कीमतों में तेज बढ़ोतरी तय मानी जा रही है:

खाद्य सुरक्षा एवं पेरिशेबल आइटम्स: खेत से बाजार तक की परिवहन लागत बढ़ने से ताजे फल, सब्जियां, सी-फूड और मीट की कीमतें सीधे प्रभावित होंगी।

दैनिक उपभोग की वस्तुएं (FMCG): किराने के सामान और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक चीजों के दाम बढ़ेंगे।

ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स: ई-कॉमर्स डिलीवरी कंपनियां और कूरियर सेवाएं माल ढुलाई शुल्क (Fuel Surcharge) बढ़ा सकती हैं।

गैर-जरूरी वस्तुएं (Non-Essential Goods): कपड़े, कॉस्मैटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और फर्नीचर जैसी चीजों पर भी अतिरिक्त इनपुट कॉस्ट का असर दिखेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक मोर्चे पर तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले समय में माल ढुलाई और उत्पादन लागत में और वृद्धि होगी, जिससे अमेरिका सहित दुनिया भर में खुदरा महंगाई दर लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।