शासकीय महाविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
पारदर्शिता पर उठे सवाल, बेरोजगारों में आक्रोश
CURATED BY – LAKESH PANCHESHWAR | CITYCHIEFNEWS
लालबर्रा, शासकीय महाविद्यालय लालबर्रा में 18 पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बेरोजगार युवाओं और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इसे गुपचुप तरीके से पूरा किया गया। सेडमेप द्वारा आयोजित इस भर्ती में केवल 48 घंटे के लिए आवेदन लिंक सक्रिय किया गया,जिसका न तो प्रचार-प्रसार हुआ और न ही किसी समाचार पत्र में विज्ञापन प्रकाशित हुआ। इस वजह से सैकड़ों योग्य उम्मीदवार इस भर्ती से अनजान रह गए।
चहेतों को फायदा पहुंचाने की साजिश?
आवेदकों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पहले से ही कुछ चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए रची गई थी। इंटरव्यू प्रक्रिया में भी पारदर्शिता का अभाव बताया गया। क्षेत्र के युवाओं का आरोप है कि जो लोग प्रबंधन के करीबी थे, उन्हें ही प्राथमिकता दी गई।
इस पर प्राचार्य सुरेंद्र खंडायत ने सफाई दी कि भर्ती प्रक्रिया योग्यता आधारित और पारदर्शी थी। उन्होंने यह भी माना कि मीडिया को समय पर सूचना देनी चाहिए थी, लेकिन इसे एक "चूक" कहकर आरोपों से बचने की कोशिश की।
बेरोजगारों में आक्रोश, चयन सूची का इंतजार
बेरोजगार युवाओं का कहना है कि इतनी बड़ी भर्ती के लिए केवल 48 घंटे का समय देना, वह भी बिना प्रचार-प्रसार के, संदेह पैदा करता है। एक आवेदक ने कहा, "यह भर्ती केवल दिखावा है। सरकार को जवाब देना चाहिए कि इतनी जल्दी और गुपचुप प्रक्रिया क्यों अपनाई गई।"
अब सबकी निगाहें चयन सूची पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्या यह प्रक्रिया सच में पारदर्शी थी, या आरोपों के पीछे सच्चाई है। इस मामले ने न केवल लालबर्रा बल्कि पूरे क्षेत्र में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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