इंदौर, देशभर में स्वच्छता के क्षेत्र में लगातार अपनी अलग पहचान कायम करने वाला इंदौर अब वायु गुणवत्ता सुधारने के मामले में भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में शहर ने देश के शीर्ष तीन शहरों में स्थान बनाया है। नगर निगम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इंदौर को सर्वेक्षण में दूसरा स्थान मिलने की संभावना है। हालांकि, यह रैंकिंग अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है और अंतिम परिणाम सोमवार, 7 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सामने आएंगे। यदि इंदौर को दूसरा स्थान मिलता है तो यह शहर के लिए स्वच्छता के बाद पर्यावरण के मोर्चे पर भी एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि होगी।

दिल्ली में होगा सम्मान

स्वच्छ वायु दिवस के अवसर पर 7 सितंबर को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों की औपचारिक घोषणा करेंगे। इस दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इंदौर को भी 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सराहना पुरस्कार' दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुरस्कार ग्रहण करने के लिए शहर के महापौर और नगर निगम आयुक्त को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी संभावित उपलब्धि की जानकारी पहुंच चुकी है।

सड़क की धूल पर नियंत्रण से लेकर हरियाली बढ़ाने तक प्रयास

इंदौर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए नगर निगम ने कई स्तरों पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। शहर में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए मशीनीकृत सफाई व्यवस्था को बढ़ावा दिया गया। प्रमुख सड़कों और मार्गों की सफाई के साथ धूल के कणों को कम करने के लिए नियमित रूप से विभिन्न उपाय किए गए। इसके अलावा शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, पौधरोपण और ग्रीन बेल्ट के विस्तार पर भी जोर दिया गया, ताकि प्रदूषणकारी तत्वों को नियंत्रित करने में मदद मिल सके।

सीएंडडी वेस्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर

निर्माण और भवनों को तोड़े जाने से निकलने वाले मलबे यानी कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सीएंडडी) वेस्ट के प्रबंधन को भी वायु प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा बनाया गया। खुले में मलबा पड़े रहने और उसके कारण धूल उड़ने की समस्या को कम करने के लिए इसके वैज्ञानिक निपटान, रीसाइकिल और रीयूज पर काम किया गया। निर्माण गतिविधियों से निकलने वाले मलबे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में किए गए प्रयासों से प्रदूषण के साथ-साथ कचरा प्रबंधन की चुनौती को भी कम करने की कोशिश की गई।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, परिवहन से प्रदूषण घटाने की कोशिश

वाहनों से निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया गया। पेट्रोल-डीजल आधारित वाहनों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित करने के प्रयास किए गए। नगर निगम के इन विभिन्न कदमों का उद्देश्य शहर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को नियंत्रित करना और लंबे समय में वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार लाना रहा है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप इंदौर की स्थिति स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में बेहतर होने का दावा किया जा रहा है।

स्वच्छता के बाद अब हवा की गुणवत्ता में नंबर वन बनने का लक्ष्य

इंदौर लगातार स्वच्छता के क्षेत्र में देश के अग्रणी शहरों में अपनी जगह बनाए हुए है। अब शहर प्रशासन का फोकस स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण और बेहतर वायु गुणवत्ता पर भी है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में टॉप-3 में जगह बनाना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शहर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी अहम है क्योंकि बढ़ते शहरीकरण, निर्माण गतिविधियों और वाहनों की संख्या के बीच वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती है। ऐसे में धूल नियंत्रण, हरियाली विस्तार, सीएंडडी वेस्ट प्रबंधन और इलेक्ट्रिक परिवहन जैसे उपायों के आधार पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है।

हालांकि, इंदौर के दूसरे स्थान पर रहने की जानकारी फिलहाल निगम सूत्रों के हवाले से सामने आई है। इसलिए अंतिम रैंकिंग को लेकर स्थिति सोमवार को आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगी। इसके बाद यह भी सामने आएगा कि इंदौर ने देश के अन्य शहरों के मुकाबले वायु गुणवत्ता सुधार के मानकों पर कैसा प्रदर्शन किया है। यदि संभावित दूसरा स्थान आधिकारिक परिणाम में कायम रहता है तो स्वच्छता के बाद स्वच्छ हवा के क्षेत्र में भी इंदौर की राष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी।