राजस्व महा अभियान 2.0 में पटवारियों पर की जा रही कार्रवाई
पटवारी संघ ने सौंपा ज्ञापन
CURATED BY – BHAGWAN DAS BERAGI | CITYCHIEFNEWS
शाजापुर, प्रांतीय आह्वान पर शाजापुर-शुजालपुर एसडीएम को पटवारी संघ द्वारा राजस्व महा अभियान 2.0 में पटवारियों पर की जा रही कार्रवाई एवं तरमीम, बटांकन में आ रही समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि सीएम हेल्पलाईन के नाम पर अनुभाग शाजापुर की तहसील शाजापुर, मोमन बड़ोदिया, गौलाना के पटवारियों का पांच दिन का वेतन रोका गया। वहीं शून्य प्रगति वाले पटवारियों का 10 दिवस का वेतन रोका गया। मोमन बड़ोदिया के पटवारी महेन्द्र चांदना को बिना किसी कारण के निलंबित किया गया, जिसमें में संबंधित पटवारी की कोई गलती नही थी, वर्तमान में राज महाअभियान 2.0 में पटवारियों पर अत्यधिक मानसिंक दबाव बनाकर कार्य करवाया जा रहा है और दैनिक लक्ष्य दिए जा रहे हैं जबकि पटवारी अपनी क्षमताओं से अधिक कार्य कर रहा है। ज्ञापन में बताया कि पटवारी अत्यधिक मानसिक दबाव में कार्य कर रहे हैं जिससे पटवारी के साथ कोई दुर्घटना हो सकती है जिसकी समस्त जवाबदारी जिला प्रशासन की होगी। इसी तरह अन्य पटवारियों पर की गई कार्रवाई का ज्ञापन में उल्लेख किया गया। साथ ही बताया कि अभियान में अधिकारियों द्वारा पटवारियों पर अनावश्यक दबाव बनाकर नियम विरूद्ध तरमीम-बटांकन का कार्य कराया जा रहा है, जो निश्चित ही भविष्य में किसी बड़े विवाद का कारण बन सकता है, क्योंकि तरमीम बटांकन का कार्य राजस्व विभाग का बहुत महत्वपूर्ण कार्य है और दबाव बनाकर कार्य कराने से त्रुटि होने की संभावना है। ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में वर्षाकाल का समय है, खेतों में फसल खड़ी है जिस कारण खेत की सीमाओं का मिलान करना संभव नही है एवं खेत की माप करना भी संभव नही है, जबकि नक्शा तरमीम में मौका मिलान अतिआवश्यक है। अनुभाग शुजालपुर तहसील, कालापीपल, अं बड़ोदिया, पोलायकलां के लगभग 95 प्रतिशत गांवों का बंदोबस्त नही हुआ है, वर्ष 1925 में बंदोबस्त हुआ था जिसकों लगभग 100 वर्ष हो चुके हैं। मप्र भू-राजस्व संहिता के अनुसार बंदोबस्त की अवधि 30 वर्ष की रहती है, 30 वर्ष बाद पुन: बंदोबस्त किया जाना चाहिए, परंतु शासन द्वारा एक भी बंदोबस्त नही कराया जबकि इस अवधि में लगभग तीन बंदोबस्त होना था, बंदोबस्त नही होने के कारण नक्षा व मौे की स्थिति में काफी भिन्न हो गई है। अनुभाग शुजालपुर के अधिकतर ग्रामों की वर्ष 1982-83 में चकबंदी हुई थी, चकबंदी में अभिलेख तो चकबंदी अनुसार बना दिए गए परंतु मौके पर उसके अनुसार कब्जा परिवर्तित नही हुआ जिससे मौका एवं अभिलेख आपस में मेल नही होता है। ऐसे में मौके पर कोई और भूमिस्वामी बैठा है तथा अभिलेख में किसी और भूमिस्वामी का नाम दर्ज है। ज्ञापन में पटवारियों पर दबाव नही बनाए जाने और पटवारियों पर की गई सभी कार्रवार्ईयों को शीघ्रातिशीघ्र वापस लिए जाने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि समाधान नही होने पर पटवारियों के द्वारा आंदोलन किया जाएगा।