डीएसपी के 16 ठिकानों पर एक साथ एसीबी की रेड
200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पाये जाने का दावा
तेलंगाना में पुलिस विभाग के डीएसपी संकीरेड्डी भीम रेड्डी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है एसीबी ने एक साथ उनके 16 ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री बरामद करने का दावा किया है प्रारंभिक जांच में एक आलीशान विला, कई लग्जरी फ्लैट, व्यावसायिक संपत्तियों के दस्तावेज, 50 एकड़ से अधिक कृषि एवं अन्य भूमि, करीब 43 लाख रुपये नकद, लगभग 2 किलोग्राम सोना, 20 किलोग्राम चांदी, विभिन्न बैंकों में जमा फिक्स डिपॉजिट, बीमा पॉलिसियों तथा शेयर बाजार में निवेश से संबंधित कागजात सामने आए हैं। इसके अलावा आवास से विदेशी शराब की 23 बोतलें भी बरामद होने की जानकारी दी गई है एसीबी अधिकारियों के अनुसार बरामद संपत्तियों का सरकारी पंजीकृत मूल्य एक बात है लेकिन बाजार मूल्य इससे कई गुना अधिक हो सकता है इसी आधार पर कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य करीब 200 करोड़ रुपये तक बताया जा रहा है हालांकि अंतिम मूल्यांकन विस्तृत जांच दस्तावेजों के सत्यापन और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही तय किया जाएगा।
जहां तक बेनामी संपत्ति का प्रश्न है फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि संबंधित संपत्तियां सीधे डीएसपी के नाम पर हैं या उनके परिवार रिश्तेदारों अथवा अन्य व्यक्तियों के नाम पर खरीदी गई हैं यदि जांच में यह साबित होता है कि वास्तविक स्वामित्व उनका है जबकि संपत्ति किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर रखी गई है तो उसे बेनामी संपत्ति माना जा सकता है इसके लिए बैंक खातों, आयकर रिकॉर्ड, भूमि पंजीयन दस्तावेजों, लेन-देन के स्रोत और निवेश संबंधी कागजात की गहन जांच की जाती है
यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है कि डीएसपी ने अपने सेवा काल में किन-किन पदों पर रहते हुए यह संपत्ति अर्जित की एसीबी आमतौर पर अधिकारी की नियुक्तियों, पदस्थापनाओं, वेतन, वैध आय के अन्य स्रोतों और घोषित संपत्तियों का मिलान करती है यदि किसी अवधि में अर्जित संपत्ति उनकी वैध आय से असंगत पाई जाती है तो उसे आय से अधिक संपत्ति का मामला माना जा सकता है वर्तमान में जांच एजेंसी उनके संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण कर रही है यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) और धारा 13(2) के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है इन प्रावधानों के अंतर्गत किसी लोक सेवक द्वारा ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने पर दोष सिद्ध होने की स्थिति में चार वर्ष से लेकर सात वर्ष तक के कारावास और आर्थिक दंड का प्रावधान है यदि बेनामी लेन-देन भी प्रमाणित होता है तो बेनामी लेन-देन निषेधअधिनियम, 1988 के तहत अलग से कार्रवाई हो सकती है जिसमें संपत्ति जब्त करने के साथ-साथ सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान मौजूद है इसके अतिरिक्त, यदि जांच में कर चोरी या आयकर नियमों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो आयकर विभाग भी स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकता है ऐसी स्थिति में अतिरिक्त कर ब्याज और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है सरकार के पास दोष सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की अवैध संपत्तियों को कुर्क करने जब्त करने और सेवा नियमों के तहत विभागीय कार्रवाई करने का भी अधिकार होता है विभागीय जांच में निलंबन, पदावनति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति अथवा सेवा से बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई संभव है
तेलंगाना सरकार और एसीबी का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है और किसी भी अधिकारी को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जाएगा वर्तमान में सभी बरामद दस्तावेजों का सत्यापन संपत्तियों का मूल्यांकन और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल जारी है जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित 200 करोड़ रुपये की संपत्ति वास्तव में आय से अधिक है या नहीं तथा संबंधित अधिकारी के खिलाफ किन धाराओं में अंतिम आरोप तय किए जाएंगे फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और किसी भी व्यक्ति को न्यायालय द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने तक कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है।
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