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आपको बता दें की यह मामला शाहनगर वन परिक्षेत्र शाहनगर के अंतर्गत आने वाले टिकरिया उपवन परिक्षेत्र कि वीट ढेसाई का है जहां के बीट प्रभारी देवीदीन पाल हैं उपवन परिक्षेत्र अधिकारी  बराती लाल और शाहनगर वन परिक्षेत्र अधिकारी आनन्द शिवहरे है।
यह वनरक्षक देविदीन पाल ढेसाई की वीट का मामला है ।
जहां पर लगभग आधा से एक किलोमीटर बरसों पुरानी जंगल के बीचों बीच बनी हुई प्लांटेशन मैं लगी हुई पत्थरों की खखरी को वन रक्षक देवीदीन पाल द्वारा संबंधित अधिकारियो की मिली भगत से उठवाकर बेच दिया गया ।
सूत्रों के अनुसार पता चला है कि प्लांटेशन मै लगी हुई पत्थर की खखरी को पंचायत कार्य मै उपयोग किया गया है।
पंचायत द्वारा खेतों की फसल रखवाली के लिए बनाई जा रही पत्थरों की खखरी के लिए वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से अपने ही जंगल की लगी हुई खखरी के सैकड़ों ट्राली पत्थरो को पंचायत खखरी निर्माण के लिए बेच दिए गए है।
शासन द्वारा  किसानों के खेतों की फसल की रखवाली के लिए पत्थर खखरी का बाउंड्रेशन  कराया जा रहा है।
लेकिन शासन द्वारा वही पर पंचायतों को इस खखरी निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त राशि दी जा रही है जिससे सरपंच,सचिव द्वारा पत्थरों को पत्थर खदानों के माध्यम से खरीद कर के खखरी निर्माण कराया जाय और लीगल तरीके से कागजी कार्यवाही पूर्ण कर राशि आहरित की जाए।
लेकिन आज कल लगभग विभागो द्वारा फर्जी तरीके की कागजी कार्यवाही पूर्ण कर शासकीय राशि को आहरित कर लिया जाता है।
ठीक उसी प्रकार ग्राम पंचायत ढैंसाई तथा वन विभाग शाहनगर के ओछी सोच रखने वाले अधिकारी कर्मचारियो की मिली भगत से शासन को चारो तरफ से चूना लगाने का कार्य कर रहे है और अपनी जेब भर रहे है।
ढैसाई बीट प्रभारी देवीदीन पाल से इस मामले मै बात की गई तो पहले वह बोले की मेरी बीट मै ऐसा नही हुआ जब पत्रकार साथियों ने कहा की हमारे पास वहा के साक्ष है तो फिर बीट प्रभारी गोल मटोल बात घुमाने लगे आप भी सुनिए बीट प्रभारी देवीदीन पाल क्या कह रहे है।
अब देखना होगा की यह मामला शासन प्रशासन के संज्ञान मै आने के बाद संबंधित अधिकारी एवम् कर्मचारियो पर क्या कार्यवाही होती है।