साल 1993 में 7 साल के एक लड़के को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से तब अगवा कर लिया गया था जब वह अपनी बहन के साथ स्कूल से घर लौट रहा था. अपहरण के तुरंत बाद परिवार को फिरौती के लिए कॉल आया था, लेकिन उसके बाद कभी पता ही नहीं चला कि वह छोटा लड़का कहां गायब हो गया. अब 30 साल बाद वही लड़का वापस अपने परिवार वालों से मिला है. ये कहानी है भीम सिंह की. भीम से राजस्थान के जैसलमेर के एक सुदूर गांव में जबरदस्ती बंधुआ मजदूरी कराई जाती थी.

क्या है पूरा मामला

साहिबाबाद में रहने वाले भीम सिंह (राजू) को 8 सितंबर, 1993 को अगवा कर लिया गया था. हालांकि उस समय पुलिस रिपोर्ट दर्ज की गई थी, लेकिन कुछ समय तक चली खोजबीन के बाद भी भीम की कुछ पता नहीं चला. मामला शांत हो गया और पुलिस के साथ-साथ घरवाले भी भीम को भूल गए.

साहिबाबाद के एसीपी रजनीश उपाध्याय के अनुसार दिल्ली के एक व्यवसायी ने भीम को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया. उसने भीम से उसके बारे में जानकारी मांगी. हालांकि भीम को अपने पते के बारे में बहुत कम जानकारी थी. व्यापारी ने भीम के बताए डिटेल्स के आधार पर कुछ नोट बनाए. पिछले शनिवार, 23 नवंबर को भीम दोपहर को खोड़ा पुलिस स्टेशन में नीली स्याही से लिखी एक चिट्ठी लेकर आया था.

भीम ने पुलिस को बताया कि वह नोएडा में कहीं से है. उसने यह भी कहा कि उसके माता-पिता और चार बहनें हैं और वह इकलौता बेटा है. उसने तुलाराम और कुछ अन्य नामों का उल्लेख किया और यह भी बताया कि उसे किस वर्ष अगवा किया गया था. इस जानकारी के आधार पर जब पुलिस ने पुरानी फाइलें खंगालीं, तो उन्हें साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में 8 सितंबर, 1993 को दर्ज अपहरण की एक एफआईआर मिली.

पुलिस ने इसके तीन दिन बाद परिवार को खोज निकाला. जांच से पता चला कि बिजली विभाग से सेवानिवृत्त तुलाराम के नौ साल के बेटे को एक ऑटो गैंग ने उस समय अगवा कर लिया था, जब वह अपनी एक बहन के साथ स्कूल से घर लौट रहा था.

भीम ने बताया कि अपहरण करने के बाद उसे राजस्थान भेज दिया था, जहां वह इतने सालों तक रहा. राजस्थान पहुंचने पर भीम को पीटा जाता था और जबरदस्ती काम कराया जाता था. उसे शाम को केवल एक रोटी दी जाती थी और भागने से रोकने के लिए रात में बांध दिया जाता था. आखिरकार राजू अपने अपहरणकर्ताओं से भागने में सफल रहा और दिल्ली जाने वाले एक ट्रक में सवार हो गया.