तेलंगाना में 1.18 करोड़ का 237 किलो गांजा जब्त
ओडिशा से पुणे जा रही खेप पकड़ी; दो तस्कर गिरफ्तार
हैदराबाद, तेलंगाना की एंटी-नारकोटिक्स एजेंसी EAGLE फोर्स ने विजयवाड़ा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-65) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लॉरी कंटेनर से 237 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। जब्त गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 1.18 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह खेप ओडिशा से हैदराबाद के रास्ते महाराष्ट्र के पुणे ले जाई जा रही थी। मामले में बिहार और पुणे के दो कथित ट्रांसपोर्टरों को गिरफ्तार किया गया है।
विश्वसनीय सूचना के आधार पर EAGLE फोर्स की स्टेट टास्क फोर्स और रचाकोंडा नारकोटिक्स पुलिस स्टेशन की संयुक्त टीम ने NH-65 स्थित YNR फंक्शन हॉल के पास वाहन की तलाशी ली। जांच के दौरान लॉरी कंटेनर के केबिन में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद किया गया।
आर्थिक मदद के बदले तस्करी करने को हुआ तैयार
पुलिस जांच के अनुसार, बिहार निवासी आरोपी राजेश कुमार वर्ष 2015 में मुंबई चला गया था, जहां वह ट्रांसपोर्ट लॉरी चलाकर जीविका कमा रहा था। दूसरा आरोपी अनिल रंगनाथ बिचारे, महाराष्ट्र के पुणे का निवासी है और मजदूरी करता है।
करीब सात महीने पहले राजेश की मुलाकात सुरेश केदारी और धर्म शिंदे से हुई, जो कथित तौर पर ओडिशा से गांजा लाकर पुणे और मुंबई में सप्लाई करते थे। राजेश ने उनके सामने सेकंड-हैंड लॉरी कंटेनर खरीदने की इच्छा जताई। आरोप है कि दोनों ने वाहन खरीदने के लिए आर्थिक सहायता देने के बदले ओडिशा से गांजा ढोने का प्रस्ताव रखा, जिसे राजेश ने स्वीकार कर लिया।
ट्रांसपोर्ट के लिए दी गई रकम
करीब चार महीने पहले राजेश ने सेकंड-हैंड लॉरी कंटेनर खरीदा। पैसों की कमी होने पर सुरेश केदारी और धर्म शिंदे ने उसे 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी। पुलिस के अनुसार, अनिल पिछले दो वर्षों से इन दोनों के साथ काम कर रहा था और ओडिशा से पुणे तक गांजा पहुंचाने में सहयोग करता था।
7 जुलाई को सुरेश और धर्म ने राजेश को 1.50 लाख रुपये दिए, जिसमें 70 हजार रुपये कमीशन और 80 हजार रुपये यात्रा खर्च के लिए थे।
दो दिन इंतजार के बाद मिली गांजे की खेप
राजेश को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में पवित्र कुमार साबर उर्फ पीतांबर साबर से संपर्क करने के लिए कहा गया। अनिल भी उसके साथ गया। 11 जुलाई को दोनों विजयवाड़ा पहुंचे और वहां एयरपोर्ट पर फिनोलेक्स पीवीसी पाइप उतारने के बाद पवित्र साबर के साथ ओडिशा के रायगढ़ जिले के गुनपुर गांव पहुंचे।
गांजा उपलब्ध नहीं होने के कारण दोनों को दो दिन तक इंतजार करना पड़ा। बाद में उन्हें विशाखापत्तनम लौटकर दो दिन और प्रतीक्षा करने के लिए कहा गया।
10 बोरियों में छिपाकर भेजी गई थी खेप
14 जुलाई की रात पवित्र कुमार साबर कथित तौर पर चार पहिया वाहन से पहुंचा और 10 बोरियों में पैक 237 किलोग्राम गांजा राजेश और अनिल को सौंप दिया। इसके बाद दोनों आरोपी हैदराबाद के रास्ते पुणे के लिए रवाना हुए।
इसी दौरान EAGLE फोर्स ने उन्हें NH-65 पर रोककर तलाशी ली। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और दावा किया कि वे केवल विशाखापत्तनम गए थे। हालांकि, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच में उनके ओडिशा के गुनपुर गांव जाने की पुष्टि हो गई।
पूछताछ में कबूला अपराध
जब पुलिस ने आरोपियों के बयान और CDR में मिले तथ्यों का मिलान कर पूछताछ की, तो दोनों ने आखिरकार लॉरी कंटेनर के केबिन में गांजा छिपाकर ले जाने की बात स्वीकार कर ली।
पुलिस के अनुसार, EAGLE फोर्स पिछले कई महीनों से ओडिशा से देश के विभिन्न राज्यों में होने वाली गांजा तस्करी पर लगातार नजर रखे हुए है। बीते दो महीनों में एजेंसी करीब 1,500 किलोग्राम गांजा जब्त कर चुकी है।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ रचाकोंडा नारकोटिक्स पुलिस स्टेशन में Cr. No. 12/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ पूरे तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में भी गांजा तस्करी से जुड़ा मामला सामने आया था, जहां एक मंदिर के पुजारी पर गेंदे के पौधों के बीच गांजा उगाने का आरोप लगा था। उस कार्रवाई में करीब 70 लाख रुपये मूल्य का गांजा जब्त किया गया था।
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