13 वर्ष बीते कोयलांचल को एसडीएम कोर्ट नहीं हुआ नसीब
विकास का खोखला दावा महज ठगा गया कोयलांचल - शैलेन्द्र श्रीवास्तव
CURATED BY – MOHMMAD MUNEER | CITYCHIEFNEWS
यूँ तो अब जनहित की बात करना तो नेताओ का काम नहीं रहा किसी सिम्बल और पार्टी के टैग पर जीतते और हारते जनप्रतिनिधियों को अब जनता के दुःख दर्द से कोई वास्ता रह नहीं गया, जिसके चलते निःशुल्क मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं में लगातार सेंध लगाई जा रही है, अब तो जनता ने भी धरती के इस जीव की परिक्रमा करना बंद ही कर चुके है, अब न तो जनता का कोई जनप्रतिनिधि रहनुमा बने ऐसा किसी को रत्ती भर का यकीं नहीं है, बावजूद जिले के कोयलांचल अंतर्गत एक आवाज जनहित में बुलंद किये जाने की सूचना मिल रही है यह ठीक वैसा है जैसा की मुर्दो के शहर में कोई जिन्दा तो है जब भी मुँह खोलता है कितनो की पोल खोल देता है l
शहडोल, जिले की ऊर्जा नगरी जो प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है उसका मूल क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का टोटा पड़ा हुआ है, और पूरा का पूरा यह कोयलांचल विकास की बाट जोहता नज़र आ रहा है यहा की जनता को केवल मतदान के वक़्त याद किया जाता है फिर पांच सालो तक माननीय नजरबंद से हो जाते है, इस बात को पूरी प्रमुखता से उठाते हुए जनता के मसीहा शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है की इस तरह स्थानीय जनता सिर्फ़ और सिर्फ ठगा रह जाता है, ना कोई नया उद्योग ना कोई नया महाविद्यालय ना तो चिकित्सा सुविधाओं में कोई इज़ाफा और तो और 13 वर्ष बीत गए बुढ़ार को तहसील का दर्जा मिले हुए पर आज तक ना तो एसडीएम कोर्ट प्रारंभ हो सका ना ही रजिस्ट्री की सुविधा प्रारंभ हो सकी l सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं की स्थिति, आज भी शिक्षा का स्तर वहीं का वहीं, नए महाविद्यालय खुलने तो दूर जो एक मात्र शासकीय महाविद्यालय है उसके भी पूर्व में संचालित कई पाठ्यक्रम अब बंद किए जा चुके हैं l जहां तक बात चिकित्सा सुविधाओं की है तो कल भी हमारे यहाँ के अस्पताल सिर्फ़ रेफ़र सेंटर थे आज भी वही स्थिति बरकरार है l
खनिज सम्पदा की खुली लूट.....
रोज़गार की तो बात करना ही बेमानी है जब पकौड़े तलना ही रोज़गार हो चुका है तो फिर शायद कुछ कहने की ज़रूरत नहीं रह जाती है l इस बात के भी कोई मायने नहीं है कि संपूर्ण कोयलांचल क्षेत्र खनिज सम्पदा से भरा हुआ है कोयला और रेत दोनों प्रचुर मात्रा में है लेकिन पिछले तीन चार दशकों से ना तो कोई नया उद्योग स्थापित हो सका ना ही इस खनिज संपदा की लूट कम हो सकी, कोयला और रेत का अवैध कारोबार ज़रूर दिन दूनी रात चौगनी गति से बढ़ता चला गया l अवैध खनन और रेत माफियाओं की तो हमेशा से बल्ले बल्ले रही, इसी खनन और रेत माफिया ने राजनीति में भी अपनी जड़े अब हर दल में इतनी गहराई तक जमा ली हैं कि राजनीति भी अब इनकी चौखट की सिर्फ़ ग़ुलाम बन कर रह गई हैl
ऐसा भी नहीं है कि विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ, हुआ पर सिर्फ़ वही निर्माण कार्य हुआ जिससे मोटी कमाई की जा सके, बुढ़ार की बदहाल मॉडल रोड और नगरपालिका परिषद धनपुरी का एलईडी लाइट घोटाला इसका जीता जागता उदाहरण है l
वर्षों बाद जब मीथेन गैस मिली तो लगा कि अब क्षेत्र में नई रिफ़ाइनरी स्थापित होगी और हज़ारो लोगों को नया रोज़गार मिल सकेगा, रिलायंस सीबीएम प्रोजेक्ट आया और मीथेन पाइप लाइन से कहीं और भेज दी गई, और लोगों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं l
नहीं टिकते ईमानदार अफसर.....
ना जाने क्यों किसी तेज तर्रार अधिकारी की इस ज़िले में पद्स्थापना ही नहीं की जाती, पिछले कई दशकों में बिरले ही अधिकारी ऐसे आये जिनके आने से कोयलांचल समेत पूरे ज़िले को उम्मीद की एक नई किरण दिखाई पड़ी, पर चाहे वो निडर आईएएस अधिकारी लोकेश जांगीड रहे हो या सबके चहेते ईमानदार आईपीएस अधिकारी अवधेश गोस्वामी, इनमें से कोई भी इस ज़िले में ज़्यादा दिन तक रुक नहीं पाया l
माफिया तो नहीं लगा रहा अड़ंगा....
13 वर्ष बीत गए बुढ़ार को तहसील का दर्जा मिले हुए पर आज तक ना तो एसडीएम कोर्ट प्रारंभ हो सका ना ही रजिस्ट्री की सुविधा प्रारंभ हो सकी, हैरानी की बात तो ये है कि जब जनता ने आवाज़ उठाई तो एक नहीं बल्कि दो दो बार एसडीएम कोर्ट का संचालन प्रारंभ हुआ पर सिर्फ़ एक ही दिन के लिए, फूल और गुलदस्तों के मुरझाने से पहले ही दूसरे ही दिन कोर्ट का संचालन किसी ना किसी कारण से बंद कर दिया गया, पता नहीं वे कौन से लोग हैं जो नहीं चाहते कि बुढ़ार में एसडीएम कोर्ट प्रारंभ हो l हो सकता है कि ये वही खनन या रेत माफिया हो जिसको डर हो कि उनके अवैध उत्खनन में अड़चन ना आने लगे, पर इससे भी कहीं ज़्यादा हैरानी की बात तो ये है कि दोनों बार इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बिलकुल मौन रहे l