शिक्षा परिस्र छात्राओं ने उठायी आवाज
प्रभारी प्राचार्य ने एसएलसी व निष्कासित कर देने की धमकी दे कर भेजा घर
Curated by - RIZWAN SHAIKH | CITYCHIEFNEWS
जोबट, कन्या शिक्षा परिस्र उदयगढ़ में पसरी अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्था की 14 छात्राओं को संस्था ने 15 दिन के लिए रेस्टिकेट कर घर भेज दिया है। भविष्य को लेकर चिंतित ये छात्राएं शनिवार दोपहर बाद जिला मुख्यालय पहुंच गई। छात्राओं ने बताया हम पढ़ाई करना चाह रही थी लेकिन जिला मुख्यालय जाकर शिकायत करने के बाद उन्हें एसएलसी (स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट) देने की धमकी और घर भेज दिया गया। मामले में छात्राओं ने अजाक थाने में आवेदन देकर प्राचार्य और अधीक्षिका पर एफआईआर की मांग की है।ये छात्राएं पिछली बार अधिकारियों से खुद के बूते मिली थी, लेकिन मामला दबा दिया गया इस बार छात्राओं को पूर्व जिका अध्यक्ष महेश पटेल का भी साथ मिला। पटेल ने सहायक आयुक्त जेएस डामोर को चेतावनी दी की अधीक्षिका और प्रभारी प्राचार्य पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे छात्राओं को लेकर भोपाल जाएंगे। डामोर को छात्राओं ने बताया प्राचार्य लाल बहादुरसिंह हमारे साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। जबकि अधीक्षिका गाली गलौज करती है। छात्राओं का आरोप है कि उन्हें नहाने के लिए पानी तक नहीं दिया जाता। खाना और पानी मांगने पर हो गाली देते हैं। प्राचार्य की शिकायत करते हुए कहा हमें धमकाया जाता है कि अगर निरीक्षण पर आए अधिकारी के सामने शिकायत की तो एसएलसी निकालकर घर भेज दिया जाएगा। छात्राओं का कहना है नाश्ते में सिर्फ सेव परमल दिए जाते हैं। छात्राओं ने मामले की शिकायत अजाक थाने में भी की है।
15 दिन के लिए किया रेस्टिकेट, पढ़ाई कैसे होगी
छात्राओं का कसूर इतना था कि समस्या लेकर 15 दिसंबर को जिला मुख्यालय पहुंची थी। तब अधिकारियों ने उन्हें समझाकर संस्था में भेज दिया। संस्था ने अगले ही दिन 16 दिसंबर को छात्राओं को रेस्टिकेट कर 15 दिन के लिए घर भेज दिया। शनिवार को आलीराजपुर आई छात्राओं ने बताया हम पढ़ना चाहते हैं फिर भी रेस्टिकेट किया। उनका आरोप है कि जब हमने जाने से मना किया तो प्राचार्य ने एसएलसी देने की धमकी दी।
कमिश्नर के आदेश का भी पालन नहीं
कन्या शिक्षा परिसर के अधूरे भवन को लेकर कुछ माह पहले विभाग के कमिश्नर ने भी नाराजगी जताई थी। वे कहकर गए थे कि 15 दिन में होस्टल का काम पूरा होना चाहिए। अब तक होस्टल तैयार नहीं हुआ। ऐसे में यहां 400 से अधिक छात्राएं स्कूल भवन पढ़ाई के साथ यहां रहने को मजबूर है।
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