Curated by - RAGHAVENDRA SINGH | CITYCHIEFNEWS

रतलाम, स्‍कूल बसों को लेकर हर स्तर पर लापरवाही इसलिए हो रहे हादसे। पुलिस के साथ ही स्कूल-अभिभावकों को सख्त होने की है जरूरत। सिर्फ अभियान के दौरान सुधार होता है बाद में स्थिति जस-तस। यह लापरवाही आगे और भारी पड़ सकती है।

सड़क सुरक्षा के लिए बातें तो बड़ी बड़ी होती हैं, लेकिन अमल नहीं किया जाता। जब तक अभियान चलता है, तब तक ही सुधार दिखता है। इसके बाद स्थिति जस की तस बन जाती है। अनफिट स्कूली बसें दौड़ती दिखाई देती हैं, तो टेंपो और ई-रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चे बैठे होते हैं। नियमों की अनदेखी अलग से की जाती है। स्कूली बच्चे भी दो पहिया वाहन से आते-जाते दिखाई देते हैं। घर से शुरू हुई लापरवाही सड़क और स्कूल के भीतर तक दिखाई देती है। यानी ना तो अभिभावक ध्यान दे रहे हैं और ना ही पुलिस सख्ती कर रही है। स्कूल भी कुछ नहीं कर रहे हैं।

निजी स्कूलों में लगे सालों पुराने हो चुके कबाड़ वाहनों में सफर कर रहे बच्चे महफूज नहीं हैं। कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। 
कुछ वाहन धक्कों से चलते हैं। इस ओर न तो जिम्मेदार का कोई ध्यान न परिवारीजन कोई ध्यान दे रहे हैं। निजी स्कूलों की मनमानी फीस का भुगतान, अत्याधुनिक सुविधाओं का दावा करने वाले अधिकतर शिक्षण संस्थानों का बुरा हाल है। यह बच्चों की सुरक्षा का दावा तो करते हैं मगर बच्चों को घर से लाने ले जाने के लिए जिन वाहनों को विद्यालय में लगाया गया है। उसके बारे में शायद इन्हें कोई फिक्र नहीं है। नवेली से रानीगांव जाने वाले मार्ग पर स्थित ,स्काई इंग्लिश एकेडमी के नाम से विद्यालय में सुबह स्कूल बस जब बच्चों को स्कूल लेकर जा रहा था। तभी रास्ते में बंद पड़ गई। इसके बाद आस पास के लोगों कर बुलाकर धक्का लगाने को कहा। लोगों ने  दूर तक धक्का लगाया तब कहीं जाकर बस स्टार्ट हुई । इसको लेकर चालक, स्कूल प्रबंधन और तो और बच्चों के अभिभावक को भी शायद इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता यही लापरवाही बड़े हादसे को जन्म देती लेकिन इन सब बातों से स्कूल संचालकों कोई फर्क नही पड़ता इस स्कूल में ही नही आस पास के गाँव मे कई निज़ी स्कूल है जिनकी गाड़िया बिना किसी फ़िटनेस बीमा और निमयों को ताक पर रख कर फर्राटे से सड़कों पर दौड़ रही है लेक़िन इन सब से अनजान मासूम बच्चें रोज इन्हीं स्कूल की गाड़ियों में रोज स्कूल से घर घर से स्कूल जा रहें है। लेक़िन इस और किसी भी जिम्मेदार का ध्यान नही है।कुछ महीनों पहले उज्जैन जिले में स्कूल वैन और ट्रक की भिड़ंत में चार बच्चों की मौत हो गई थी जबकि 11 बच्चे घायल हुए थे। हादसा दोनों वाहनों के चालकों की लापरवाही के कारण हुआ। दोनों ही तेज गति से अपने-अपने वाहन चला रहे थे। इस हृदयविदारक घटना पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने ट्वीट कर दुख जताया था। व पिपलोदा में स्कूल बस से मासूम बच्चें की कुचल ने से मौत के बाद प्रसासन थोड़े दिन के लिए जागा और फ़िर वही पहले जैसे हालत शायद प्रसासन को फिर एक ओर हादसे का इंतजार है।

स्कूल बस के संचालन में ये है जरूरी

  • बस में कैमरा होना चाहिए।
  • जीपीआरएस ट्रैकर।
  • अग्निशमन यंत्र।
  • मेडिकल किट।
  • बस के परमिट होने चाहिए।
  • बस की फिटनेस सर्टिफिकेट।
  • प्रदूषण वैधता प्रमाणपत्र।
  • ड्राइविंग लाइसेंस।
  • एक पुरुष और महिला हेल्पर होना चाहिए।
  • साइड की तीन पाइप होनी चाहिए, जिससे बच्चा सिर बाहर नहीं निकाल पाए।
  • सीट बेल्ट होनी चाहिए।
  • बस के पीछे स्कूल के नाम और नंबर लिखे होने चाहिए।
  • स्पीड गर्वनर होना चाहिए, जो ओवर स्पीड नहीं होने देता है।
  • बस की वैधता होनी चाहिए।
  • ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन हो।

इन सब नियमों में से आधे से ऊपर  नियमो को फॉलो नही किया जाता और फिर बड़े हादसे को न्योता देते।

बरहाल-अब देखने वाली बाद यह होगी कि जिम्मेदार  इन सब निमयों को फॉलो कराने के लिए बड़ा एक्शन लेगी या फ़िर कोई बड़े हादसे के बाद जागेगी।