नई दिल्‍ली. कांग्रेस (Congress) अपने उन विधायकों से परेशान है जो जीतने के बाद पाला बदल कर लेते हैं. कर्नाटक, गोवा, मध्‍यप्रदेश और पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों की घटनाओं से सबक लेते हुए अब कांग्रेस गुजरात (Gujarat) में नया फॉर्मूला अपना रही है. पार्टी ने अपने उम्‍मीदवारों के चयन के लिए कुछ बिंदु तय कर लिए हैं. पार्टी उन लोगों पर भरोसा नहीं करना चाहती जो किसी भी कारण से संदिग्‍ध लग रहे हैं. ऐसे उम्‍मीदवार जो जीतने की क्षमता रखने के बावजूद अगर किसी कारणवश पाला बदलने को मजबूर हो सकते हैं तो उन्‍हें पार्टी टिकट नहीं देना चाहती.

पार्टी सूत्रों ने बताया कि टिकट देने से पहले पार्टी उम्‍मीदवार की आर्थिक स्थिति का स्‍वतंत्र आकलन करवा रही है. पार्टी उम्‍मीदवार के साथ ही उनके परिवार, पत्‍नी और संतानों की आर्थिक स्थिति, उनके व्‍यवसाय आदि की जानकारी ले रही है. पार्टी के सूत्रों ने बताया कि बीती घटनाओं से सबक लेते हुए गुजरात में यह नया फॉर्मूला अपनाया जा रहा है. इससे पहले गुजरात में भी 2017 के चुनाव में कांग्रेस के 77 उम्‍मीदवार जीते थे, लेकिन 2022 आते-आते उसके 15 विधायक कम हो गए हैं. अन्‍य राज्‍यों में भी विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया था.

गुजरात में आम आदमी पार्टी ने कसा तंज 

गुजरात में आम आदमी पार्टी ने यही कहना शुरू कर दिया है की कांग्रेस को वोट देने का मतलब बीजेपी को वोट देना है क्योंकि जीतने के बाद विधायक बीजेपी के पास चले जाते हैं. कर्नाटक,गोवा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर के राज्यों के कांग्रेस विधायक जब पार्टी छोड़ कर जाते हैं या बीजेपी में शामिल हो जाते है तो कांग्रेस अक्सर ये आरोप लगाती है की ED और IT का डर दिखाकर उनको कांग्रेस छोड़ने पर मजबूर किया जाता है. गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा स्क्रीनिंग में उम्मीदवारों के आर्थिक और आपराधिक रिकॉर्ड और उनके परिवार के काम धंधे से उनकी आय को देखकर ही टिकट दिए जायेंगे. गुजरात में 1 और 5 दिसंबर को दो चरणों में चुनाव होगा और 8 दिसंबर को नतीजे आएंगे.