रीवा: नायब तहसीलदार के खिलाफ चल रहे अनशन पर लगा विराम
जवा नायब तहसीलदार को हटाने सहित अन्य 7 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आमरण अनशन को सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह के आश्वासन के बाद टूटा
Curated by - ABHISHEK TIWARI | CITYCHIEFNEWS
रीवा, जवा तहसील अंतर्गत अतरैला सर्किल के पदस्थ *नायब तहसीलदार उमेश तिवारी के तानासाही और मनमानी रवैये के खिलाफ चल रहे आमरण अनशन में आज तीसरे दिन विराम लग गया। जहा पर स्थानीय विधायक दिव्यराज सिंह के आश्वासन के बाद विधायक के द्वारा पानी पिलाकर आमरण अनशन को तुड़वाया गया।
आपको बताते चले कि नायब तहसीलदार उमेश तिवारी के द्वारा सीमांकन, बटवारा, नामान्तरण, गरीबी रेखा में नाम जुड़वाने सहित अन्य कई कार्यो के नाम पर किसानों और गरीबो के साथ जमकर लूट करते आ रहे है* ऐसा आमरण अनशनकारी भाजपा नेता रमाकांत यादव ने आरोप लगाए है।
इसके साथ ही 1 नवंबर 2022 को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के दिन से जवा तहसील कार्यालय के सामने नायब तहसीलदार सर्किल अतरैला उमेश तिवारी को हटाने की मांग सहित अन्य 7 सूत्रीय मांगों को लेकर आमरण अनशन किया जा रहा है जो आज विधायक दिव्यराज सिंह के द्वारा आमरण अनशन को तुड़वाया गया।
अनशनकारी ने बताया कि 1 वर्ष से नायब तहसीलदार के आगे पीछे चक्कर लगा रहा था लेकिन कार्य नही हुआ तो मजबूरन आमरण अनशन पर बैठना पड़ा
आपको बता दे कि इस सर्किल में ऐसे ही कई किसान है जो वर्षो से अपने कार्य के लिए नायब तहसीलदार के आगे पीछे दौड़ रहे है लेकिन कार्य नही हो रहा। जो हमेशा अपने कमरे में रहकर कार्यालय चलाते है और शाम 3 से 4 बजे जवा तहसील कार्यालय पहुचकर देर रात्रि तक अपने चहेतों का कार्य करते है। बाकी किसान परेसान रहते है।
जबकि उनके द्वारा बताया जाता है कि मेरी सर्किल जिले में दूसरे नंबर पर है दूसरे नंबर पर होने के बाद भी सर्किल के किसान और आमजन मानस परेसान है
जबकि हकीकत कुछ और है बर्ना किसानों और भाजपा नेताओं को आमरण अनशन न करना पड़े।
जहा पर भाजपा नेता रमाकांत यादव के द्वारा बताया गया कि फैसला करने तथा अन्य कार्यो में बगैर रिश्वत लिए नायब तहसीलदार उमेश कुमार तिवारी के द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता है।
दूसरा मामला पटेहरा का है जिसके लिए आवेदक दयाशंकर उपाध्याय आज 3 साल से कोर्ट का चक्कर लगा रहा है जिसमे स्वयं नायब तहसीलदार आदेश जारी करते है और स्वयं के आदेशों की अवहेलना करते है। कल दिनांक 2 नबम्बर को अतिक्रमण हटाने की तारीख निश्चित की गई थी लेकिन पूरा दिन संबंधित अधिकारी गायब रहे।
जिससे विवश होकर आवेदक ने अपने आप को कमरे में कैद कर लिया था तब अतरैला थाना प्रभारी कन्हैया सिंह बघेल, थाना स्टॉप और घर वालो के समझाइस के बाद आवेदक बाहर आया था इस तरह से पूरे सर्किल की जनता परेसान है।
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