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शाजापुर, शहर में कंस वधोत्सव की अनूठी परंपरा इस बार फिर निभाई जाएगी। कंस चौराहा स्थित दरबार में बैठाए गए कंस के पुतले का वध बुधवार को रात 12 बजे किया जाएगा। मथुरा में कंस के वधोत्सव की परंपरा का निर्वहन प्राचीन समय से किया जाता रहा है. वहीं मथुरा के बाद शाजापुर में करीब 270 वर्षों से यह आयोजन हो रहा है। शाजापुर में यह आयोजन भव्य पैमाने पर किया जाता है।

कंस वधोत्सव समिति के संयोजक तुलसीराम भावसार एवं समिति पदाधिकारी अजय उदासी व संजय शर्मा ने बताया कि कंस के पुतले को कंस चौराहे पर बैठा दिया गया है और आज कंस वध किया जाएगा। कंस वधोत्सव का कार्यक्रम दशमी पर होता है। दशमी की शाम को कलाकार देव व दानव की वेशभूषा में तैयार होते हैं। इसके पश्चात देव व दानवों का जुलूस निकलता है। यह जुलूस बालवीर हनुमान मंदिर से कंस चौराहा, मगरिया, बस स्टैंड होते हुए गवली मोहल्ले पहुंचेगा जहां देवता और दानवों के बीच वाकयुद्ध होगा। इसके बाद चल समारोह आजाद चौक पहुंचेगा और यहां भी देव व दानवों में चुटीले संवादों का वाकयुद्ध होगा। इसके बाद चल समारोह सोमवारिया बाजार में कंस चौराहा पर पहुंचेंगे और यहां एक बार फिर वाकयुद्ध के माध्यम से देवता और दानव आपस में भिड़ेंगे। इसके बाद रात को 12 बजते ही कंस वध किया जाएगा। पारंपरिक वेषभूषा में श्रीकृष्ण बने कलाकार द्वारा कंस के पुतले का वध किया जाकर उसे सिंहासन से नीचे गिराया जाएगा। यहां पर पहले से ही हाथ में लाठी और डंडे लिए हुए तैयार गवली समाजजन लाठियों से पीटते हुए कंस के पुतले को घसीटते हुए ले जाएंगे।

गवली समाजजनों का किया जाएगा सम्मान

सोमवारिया बाजार में रात 11.45 बजे गवली समाजजनों के पहुंचने पर समाज के वरिष्ठों का साफा बांधकर और पुष्पमाला से स्वागत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विगत दो वर्ष से कोरोना संक्रमण के चलते आयोजन को सीमित किया गया था लेकिन इस बार इसकी तैयारियां वृहद रूप से की जा रही है। नगर में चल समारोह में देवता बनने वाले कलाकार लोगों का अभिवादन करेंगे। वहीं दानवों का रूप धरे कलाकार राक्षसी अट्टहास से सभी को डराएंगे।