अप्रैल से अक्टूबर में राजकोषीय घाटा बढ़ा
7.58 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा
नई दिल्ली, केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) अप्रैल-अक्टूबर में बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गया है. यह घाटा साल भर के लक्ष्य का 45.6 प्रतिशत है. कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (Controller General of Accounts) द्वारा 30 नवंबर को जारी आंकड़ों से पता चलता है कि देश के राजकोषीय घाटे में इजाफा हुआ है. केंद्र ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 16.61 लाख करोड़ रुपये या फिर जीडीपी का 6.4 प्रतिशत रखा है. फिस्कल डेफिसिट सरकार के व्यय एवं राजस्व के बीच के अंतर को दर्शाता है.
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि शुद्ध कर प्राप्तियां बढ़कर 11.71 लाख करोड़ रुपये हो गईं, वहीं, कुल खर्च भी 21.44 लाख करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल अप्रैल से अक्टूबर तक राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2022 के लक्ष्य का 36.3% था. अप्रैल से सितंबर की अवधि में राजकोषीय घाटा बढ़कर ₹6.20 लाख करोड़ तक पहुंच गया था. जो वार्षिक अनुमान का 37.3% था.
6.4% निर्धारित किया था लक्ष्य
इस साल फरवरी में वार्षिक बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2023 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP का 6.4% निर्धारित किया था. जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह लक्ष्य 6.7% था.
क्या होता है राजकोषीय घाटा?
राजकोषीय घाटा को अंग्रेजी में फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) कहा जाता है. राजकोषीय घाटा अपने नाम के मुताबिक सरकार के आय से अधिक खर्च को दिखाने का संकेतक है. सरकार विभिन्न तरह के टैक्स लगाकर पैसा जुटाती है, जिसे कि सरकार की आय कहा जाता है. इसके बाद, सरकार जनहित के विभिन्न कार्यों में उसी पैसे को लगाती है. यदि खर्च अधिक होता है तो इसे राजकोषीय घाटे का नाम दिया जाता है. यह सरप्लस के उलट है, क्योंकि जब सरकार की आय उसके खर्च से अधिक हो तो उसे फायदा या सरप्लस कहा जाता है. सरकार की आय अथवा आमदनी में उधार को नहीं जोड़ा जाता है.
देश
दुनिया
मनोरंजन
खेल
छत्तीसगढ
हरियाणा
दिल्ली
धार्मिक
व्यापार
टेक & ऑटो
शिक्षा
स्वास्थ्य
आंध्र प्रदेश
तेलंगाना
सिक्किम
ओड़िशा
झारखंड
असम
नागालैण्ड